
पटियाला हाउस कोर्ट ने तय की प्रबीर पुरकायस्थ की जमानत की शर्तें, बिना इजाजत देश छोड़ने पर लगाई रोक
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प्रबीर पुरकायस्थ ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनैती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने माना कि न्यूजक्लिक के संस्थापक की गिरफ्तारी अवैध थी, क्योंकि गिरफ्तारी के वक्त उन्हें गिरफ्तारी की वजह लिखित में नहीं दी गई थी. अब पटियाला हाउस कोर्ट ने उनकी जमानत की शर्तें तय की है.
UAPA मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने न्यूज क्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ पर जमानत की शर्ते तय की हैं. पटियाला हाउस कोर्ट ने एक लाख के बेल बॉन्ड और श्योरिटी पर पुरकायस्थ को जमानत दी है. कोर्ट ने कहा कि प्रबीर बिना कोर्ट की इजाजत के देश नहीं छोड़ेंगे.
पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा कि प्रबीर गवाहों और अप्रूवर से संपर्क नहीं करेंगे. साथ ही वह केस की मैरिट्स के बारे में बात नहीं करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को प्रबीर पुरकायस्थ की रिहाई का आदेश देते हुए दिल्ली पुलिस द्वारा यूएपीए के तहत उनकी गिरफ्तारी को अवैध बताया.
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सुप्रीम कोर्ट से क्यों मिली जमानत?
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि मामले में रिमांड कॉपी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे उनकी गिरफ्तारी गलत साबित होती है. मसलन, कोर्ट ने पंकज बंसल केस का हवाला दिया, जिसमें कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि किसी की भी गिरफ्तारी से पहले गिरफ्तारी की वजह लिखित में देना होगा.
प्रबीर पुरकायस्थ ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को जाजय ठहराया था. जस्टिस मेहता द्वारा लिखे गए 42 पन्नों के फैसले में कहा गया है, "कोर्ट के मन में कोई संदेह नहीं है कि यूएपीए के प्रावधानों के तहत अपराध करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए किसी भी शख्स या उस मामले के लिए किसी अन्य अपराध में गिरफ्तारी का आधार लिखित में देना होता है."

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