
नॉर्थ कोरिया ने दागी क्रूज मिसाइल, परमाणु सबमरीन पर भी चल रहा काम... किम ने फिर दिखाई सैन्य शक्ति
AajTak
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने लॉन्ग रेंज रणनीतिक क्रूज मिसाइलों की टेस्टिंग की की निगरानी की और देश की परमाणु युद्ध क्षमता को
उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत दिखाते हुए लॉन्ग रेंज रणनीतिक क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया और इसका निरीक्षण किया. यह परीक्षण रविवार को हुआ, जिसमें मिसाइलें कोरियाई प्रायद्वीप के पश्चिमी समुद्र में उड़ान भरकर अपने लक्ष्य को सटीक रूप से भेदने में सफल रहीं.
केसीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, किम जोंग उन मिसाइलों की उड़ान और लक्ष्य पर सही ढंग से लगने से संतुष्ट नजर आए. उन्होंने कहा कि देश की परमाणु क्षमता और उसकी तेज प्रतिक्रिया की नियमित जांच "जिम्मेदार अभ्यास" है, खासकर जब देश को "विभिन्न सुरक्षा खतरों" का सामना करना पड़ रहा हो.
यह भी पढ़ें: नॉर्थ कोरिया में क्यों खत्म हो गया कागज? बैंक नोट और अखबार छापने के लिए भी नहीं बचे पेपर
किम ने दोहराया कि प्योंगयांग अपनी "राज्य परमाणु युद्ध शक्ति के असीमित और निरंतर विकास" के लिए सभी प्रयास जारी रखेगा. यह बयान ऐसे समय में आया है, जब उत्तर कोरिया 2026 की शुरुआत में होने वाली महत्वपूर्ण पार्टी कांग्रेस की तैयारी कर रहा है, जिसमें अगले पांच वर्षों के लिए देश की विकास योजना तय होगी.
मिसाइल लॉन्च साइट रखा गुप्त
केसीएनए ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मिसाइलें कहां से दागी गईं. दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी योनहाप ने बताया कि दक्षिण कोरियाई सेना ने रविवार सुबह प्योंगयांग के पास सुनान इलाके से कई मिसाइल टेस्ट का पता लगाया. दक्षिण कोरियाई सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि उत्तर कोरिया साल के अंत तक और मिसाइल परीक्षण कर सकता है.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









