
नैनीताल बना नशे के कारोबारियों का पसंदीदा अड्डा, पुलिस का नहीं है ड्रग तस्करों पर कंट्रोल
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वर्ष 2023 में नैनीताल जिले में अब तक चरस के 13 मामले दर्ज हुए हैं, 16 अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया है, और 17.827 किलो चरस बरामद की गयी है. बीते 5 महीने में स्मैक से संबंधित 38 मुकदमे दर्ज हुए हैं , 95 अभियुक्त को गिरफ्तार किये जा चुके हैं और 1.677 किलो स्मैक बरामद की गई है.
नशे का कारोबार निश्चित रूप से युवाओं में बेतहाशा बढ़ता गया है. पंजाब के उड़ता पंजाब बनने की कहानी तो खैर पुरानी हो चुकी है, फिलहाल आध्यात्मिकता, नैसर्गिक विविधता, जैवसम्पदा, पर्यटन, तथा यहां के रहवासियों के सीधे-सरल स्वभाव के चलते अपनी विशिष्ठ पहचान बना चुके उत्तराखंड राज्य के कई जिले भी इस वक्त नशे की गिरफ्त में हैं.
नैनीताल जिले में चरस का कारोबार वर्ष 2022 में नैनीताल जिले में चरस के कुल 27 मुकदमे दर्ज किए गए, 29 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया और 22.932 किलो चरस बरामद की गई. स्मैक जैसे घातक नशे की तस्करी के चलते 124 मुकदमे दर्ज किए गए, 176 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया और 4.558 किलोग्राम स्मैक बरामद की गई.
वर्ष 2023 में नैनीताल जिले में अब तक चरस के 13 मामले दर्ज हुए हैं, 16 अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया है, और 17.827 किलो चरस बरामद की गयी है. बीते 5 महीने में स्मैक से संबंधित 38 मुकदमे दर्ज हुए हैं , 95 अभियुक्त को गिरफ्तार किये जा चुके हैं और 1.677 किलो स्मैक बरामद की गई है.
जाहिर है गुमराह हो रही युवा पीढी के भविष्य को अंधकार में धकेलने का सामान फिलवक्त नैनीताल जिले में सहज सुलभ है. पुलिस की कथित रूप से बढ़ रही सख्ती और गाहे-बगाहे पकड़े जाने वाले पैडलर्स और छोटे-मोटे तस्करों की गिरफ्तारी के बावजूद इनके हौसले बुलंद हैं.
मुख्यमंत्री ने प्रदेश को नशामुक्त बनाने का नारा देकर अपनी चिंता और सदाशयता को बेशक जाहिर किया है और पुलिस द्वारा भी यदा-कदा पकड़े गए तस्करों को मुख्यमंत्री के इस नारे की नज़र कर अपनी पीठ सहला ली जा रही है. छोटे-मोटे तस्करों और पैडलर्स के अपवाद को छोड़ कर किसी बड़े गैंग या किंगपिन की गिरफ्तारी कर इस धंधे की कमर तोडा जाना फिलहाल शेष है.
आसानी से उपलब्ध है नशे का इंजेक्शन यूपी से हल्द्वानी होते हुए मादक पदार्थों की तस्करी पहाड़ी इलाकों में बेखौफ जारी है. पर्वतीय इलाकों के युवाओं को स्मैक, चरस, हीरोइन, नशीली दवाओं, अफीम सहित तमाम नशीले इंजेक्शन की खेप बड़े से लेकर छोटे स्तर पर सुगमता के साथ उपलब्ध हो रही है. सूत्र बताते हैं कि इस कारोबार में शामिल कैरियर कोड वर्ड का प्रयोग करते हैं. नशे की गोलियां और कैप्सूल बादाम नाम से बेची जाती हैं. इंजेक्शन को सैट नाम दिया गया है. स्मैक का कोड वर्ड पाउडर है. तस्कर अपने नेटवर्क में आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को रुपयों का लालच देकर शामिल कर रहे हैं और अब तस्करी में महिलाओं का भी इस्तेमाल किया जाने लगा है.

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