
नेपाल प्लेन क्रैश: 19 सवार में से 18 की मौत, हादसे में बचे पायलट की तस्वीर आई सामने
AajTak
नेपाल में हुए विमान दुर्घटना में 18 लोगों की मौत हो गई है. इस हादसे में एक व्यक्ति जिंदा बचा है और वो विमान का पायलट है. पायलट मनीष रत्न शाक्य को मलबे से सुरक्षित निकाल लिया गया है और उनकी एक तस्वीर सामने आई है.
नेपाल की राजधानी काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बुधवार को भयावह विमान दुर्घटना में 18 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. पोखरा जा रहे विमान में 19 लोग सवार थे और टेक ऑफ के एक मिनट के अंदर ही विमान क्रैश हो गया. इस हादसे में विमान के पायलट को बचा लिया गया. इकलौते सर्वाइवर पायलट के रेस्क्यू की एक तस्वीर सामने आई है जिसमें रेस्क्यू टीम उन्हें क्रैश स्पॉट से निकालकर ले जाती दिख रही है.
37 साल के पायलट कैप्टन मनीष रत्न शाक्य खून से लथपथ दिखाई दे रहे हैं. तस्वीर में दिख रहा है कि रेस्क्यू टीम उन्हें खाई से ऊंचाई की तरफ निकालकर ले जा रही है. पायलट का चेहरा खून से सना है और उनकी यूनिफॉर्म भी खून से भीगी हुई है. हादसे में पायलट शाक्य की जान तो बच गई लेकिन उनके को-पायलट सुशांत कटुवाल और बाकी लोगों को नहीं बचाया जा सका.
पायलट शाक्य को विमान के मलबे से निकालकर इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि पायलट की आंख जख्मी हुई है लेकिन वो खतरे से बाहर हैं.
उड़ान भरने के एक मिनट के अंदर ही आग का गोला बना विमान
सौर्य एयरलाइंस के विमान बॉम्बार्डिर CRJ-200ER ने 11 बजकर 11 मिनट पर रनवे 2 से टेकऑफ किया था. उड़ान भरने के एक मिनट के अंदर ही विमान रनवे 20 की पूर्व दिशा में एक खाई में जा गिरा.
प्रत्यक्षदर्शियों ने स्थानीय मीडिया से बताया कि प्लेन रनवे के दक्षिणी छोर से टेक ऑफ कर रहा था. टेक ऑफ के तुरंत बाद ही जहाज पलटा और झटके खाने के बाद जमीन से टकरा गया. पलक झपकने से भी कम समय में विमान में आग लग गई और वो खाई में जा गिरा. हादसे के बाद काले त्रिभुवन एयरपोर्ट काले धुएं से भर गया.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









