
नशे के सौदागर राष्ट्रीय अपराधी, इन्हें बख्शा नहीं जाएगा- CM योगी
AajTak
मेरठ पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नशे के सौदागरों पर जोरदार हमला बोला है. उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर कोई भी यूपी के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का काम करेगा तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी, पूरे राज्य में अभियान शुरू किया जाएगा.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को मेरठ दौरे पर गए थे. वहां पर सीसीएस यूनिवर्सिटी के प्रेक्षागृह में आयोजित टैबलेट और घरौनी वितरण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवाओं को कई संदेश दिए थे. एक तरफ उन्होंने नशा सौदागरों को चेतावनी दी थी तो वहीं युवाओं के लिए उठाए जा रहे कदमों की भी जानकारी दी.
जहरीली शराब के खिलाफ अभियान
सीएम योगी ने कहा कि नशे के सौदागरों के खिलाफ जो अभियान चल रहा है उसमें समाज के हर तबके को अपनी भागीदारी दिखानी होगी, क्योंकि ये युवाओं के साथ साथ देश को बचाने का अभियान है. जहरीली शराब हो या फिर किसी भी प्रकार के ड्रग्स के जरिए युवा पीढ़ी को बर्बाद करने की साज़िश, अभियान के साथ इसे समाप्त करना होगा.
वहीं नशे को बढ़ावा देने वालों को सख्त हिदायत देते हुए सीएम कह गए कि नशे के अवैध कारोबार में जो भी लोग संलिप्त हैं, हम उन्हें चिह्नित कर रहे हैं, इसके बाद उनकी सारी संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी. नशे के कारोबार को राष्ट्रीय अपराध के आधार पर अपराधी घोषित करते हुए सज़ा दिलाने का कार्य सरकार करेगी. अगर कोई युवा पीढ़ी के जीवन के साथ खिलवाड़ करेगा तो उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा.
पीएम मोदी की तारीफ में क्या कहा?
नशे पर बात करने के अलावा मुख्यमंत्री ने मोदी सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की भी जमकर तारीफ की. उन्होंने ये भी कहा कि अब यूपी इस दिशा में काफी तेजी से आगे बढ़ा है. वे कहते हैं कि पिछले 8 वर्षों में हमारा देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नए भारत के रूप में बदलने को अग्रसर है. प्रधानमंत्री मोदी ने योजनाओं का एक केंद्र बिन्दु बना दिया है. देश के गांव, गरीब, युवाओं, महिलाओं समेत समाज के प्रत्येक वर्ग के लोगों को बिना भेदभाव के योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.







