
'नरेंद्र मोदी लोकप्रिय नेता, फिर बनेंगे भारत के PM', अमेरिकी सांसद का दावा
AajTak
अमेरिकी सांसद रिच मैककॉर्मिक ने एक इंटरव्यू के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है. उन्होंने पीएम मोदी को एक बेहद ही लोकप्रिय नेता बताया और कहा कि वो एक बार फिर से भारत के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं.
अमेरिका (America) में रिपब्लिकन सांसद रिच मैककॉर्मिक (Rich McCormick) ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक लोकप्रिय नेता करार देते हुए विश्वास जताया है कि वह आगामी लोकसभा चुनाव में फिर से जीत हासिल करेंगे. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी बेहद लोकप्रिय नेता हैं. एजेंसी के मुताबिक उन्होंने कहा कि मैं पीएम मोदी और कई अन्य कांग्रेसियों के साथ लंच किया था और पार्टी लाइनों से परे उनकी लोकप्रियता देखी. मुझे लगता है कि उनकी लोकप्रियता सत्तर फीसदी है. वह फिर से प्रधान मंत्री बनने जा रहे हैं.
एक इंटरव्यू के दौरान अमेरिकी सांसद ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था, विकास, सभी लोगों के प्रति सद्भावना उनके रणनीतिक संबंधों को प्रभावित करने जा रहा है. मैं बहुत सकारात्मक तरीके से उनके प्रभाव की उम्मीद करता हूं.
यह भी पढ़ें: इजरायल-हमास सीजफायर पर भारतीय मूल के 3 अमेरिकी सांसदों ने कही ये बड़ी बात
रिच मैककॉर्मिक ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था हर साल चार से आठ फीसदी तक बढ़ रही है. उन्होंने चीन द्वारा की गई कुछ चीजों की एक तरह से नकल की है. उन्होंने कहा कि आगे बढ़ने पर उन्हें बड़ा फायदा मिलेगा क्योंकि बिजनेस भारत में एक विस्तारित बाजार में प्रवेश करना चाहते हैं.
रिच मैककॉर्मिक आगे कहते हैं कि हमें बस यह तय करना है कि जब हम उन तकनीकों को साझा करते हैं, जिन पर दोनों देशों को भरोसा है, तो दोनों देशों को समझ में आए. अच्छी खबर यह है कि हम चीन जैसा आक्रामक रुख नहीं देखते हैं. यकीनन हम मार्क्सवादी धर्मशास्त्र में विश्वास करने वाले चीन जैसे निरंकुश देशों का विरोध करने के लिए भारत के साथ एक अविश्वसनीय रूप से अहम रणनीतिक और सामरिक सहयोगी देखते हैं.
अमेरिकी कांग्रेसी ने आगे कहा कि हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि हम उस रिश्ते को आगे बढ़ाएं, जहां सच्चा विश्वास हो, जिससे हमें यह एहसास होता रहे कि भारत ईमानदार है. वे हमारी प्रौद्योगिकियों को चुराने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, वे उन्हें शेयर करने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसा करने के लिए अपने आर्थिक ताकत का उपयोग करना ठीक है और जब तक हम एक ईमानदार बातचीत कर रहे हैं, हम भविष्य में एक शानदार बातचीत कर सकते हैं.

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान को एक तकनीकी खराबी की वजह से वापस वाशिंगटन लौट आया. विमान को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में सुरक्षित उतारा गया. ट्रंप के एयर फोर्स वन विमान में तकनीकि खराबी की वजह से ऐसा करना पड़ा. विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद उसमें एक मामूली बिजली खराबी की पहचान की थी. राष्ट्रपति ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में शिरकत करने के लिए स्विट्ज़रलैंड के दावोस जा रहे थे.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.







