
‘धुरंधर 2’ की कामयाबी का क्या है सच: कंट्रोवर्सी, पॉलिटिक्स या कंटेंट?
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‘धुरंधर 2’ पर पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा का विवाद छिड़ गया है. इधर फिल्म में दिखाए गए राजनीतिक एंगल पर बहस तेज है. उधर कमाई के बड़े-बड़े रिकॉर्ड टूटे जा रहे हैं. क्या ये कंट्रोवर्सी ही 'धुरंधर 2' की धुआंधार कामयाबी की वजह है? या आदित्य धर का कंटेंट जनता को चार घंटे सीट से चिपकाए रखने वाला जादू बुन रहा है?
पिछले कुछ सालों में सबसे ज्यादा तगड़ी हाइप वाली बॉलीवुड फिल्म ‘धुरंधर 2’ पर विवाद छिड़ चुका है. बात बिल्कुल भी हैरान करने वाली नहीं है क्योंकि तीन महीने पहले ‘धुरंधर’ देखते वक्त ही लोगों को पता था कि इस कहानी का सेकंड पार्ट जो दिखाने वाला है, उसपर ‘प्रोपेगेंडा’ का टैग लगना ही है. ये टैग पहली फिल्म पर भी लगा था क्योंकि आदित्य धर की कहानी के कुछ हिस्सों की भाव-भाषा-भंगिमा, भारत की सत्ता संभाल रही राजनीतिक पार्टी से मेल खा रही थी.
अब अगर ‘धुरंधर 2’ में पॉलिटिकल मसाले का डोज पहले से काफी तेज हुआ है, तो इसके तीखेपन से जीभ जलाने वालों का भभकना भी बढ़ना ही था. मगर पूरी बहस का इस बात पर टिक जाना विचित्र है कि ‘धुरंधर 2’ पर पॉलिटिकल रंग चढ़ाने का मकसद, कंट्रोवर्सी का सागर मथकर बॉक्स ऑफिस कामयाबी का अमृत निकालना है.
क्यों विवादों में है ‘धुरंधर 2’? ‘धुरंधर 2’ लगभग सरप्राइज करते हुए पॉलिटिकल संकोच का वो झीना पर्दा भी उतार फेंकती है, जो ‘धुरंधर’ ने बचा रखा था. पहली फिल्म से दूसरी फिल्म तक भारत की सरकार बदलना, कहानी के तेवर बदलने लगता है. पाकिस्तान में मिशन पर तैनात भारतीय जासूस को ‘खुलकर खेलने’ की परमिशन नई सरकार आने के बाद मिलती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शपथग्रहण स्क्रीन पर आता है. कुछ सीन्स बाद वो नोटबंदी की ऐतिहासिक घोषणा करते हुए दिखते हैं.
पाकिस्तान की जमीन से चल रहे आतंकी नेटवर्क्स के तार, पंजाब की ड्रग समस्या और हिंसा से जुड़ते हैं. लेकिन डायरेक्ट नहीं, बीच में एक महत्वपूर्ण कड़ी और है— उत्तर प्रदेश का एक चर्चित नेता. ‘धुरंधर 2’ इन नेता का नाम सीधा नहीं लेती. मगर जो नाम देती है, जो शक्ल-शख्सियत दिखाती है उससे लोग साफ पहचान ले रहे हैं कि ये किस रियल लाइफ व्यक्ति की तरफ इशारा है. जिसके आपराधिक रिकॉर्ड्स पुलिस फाइलों से मीडिया रिपोर्ट्स तक सबके सामने हैं. इन नेता की हत्या भारतीय मीडिया चैनलों के सामने लाइव हुई थी. ये हत्या किसने और क्यों करवाई, ये आज भी एक रहस्य ही है.
‘धुरंधर 2’ में उस नेता के किरदार की हत्या को, टेरर नेटवर्क तोड़ने के मिशन का हिस्सा बना दिया गया है. यानी उसी ‘मिशन धुरंधर’ का हिस्सा, जिसे पाकिस्तान में रणवीर सिंह का हीरो पूरा कर रहा है. भारत के लिए नासूर बन चुके टेरर, ड्रग्स, अवैध हथियारों का नेटवर्क एक पॉइंट पर देश से भगोड़ा घोषित हो चुके चर्चित गैंगस्टर से जुड़ जाता है— दाऊद इब्राहिम. ‘धुरंधर 2’ इस मिशन की असली कामयाबी का क्रेडिट पीएम मोदी के शासनकाल में लिए गए फैसलों को देती है. ‘प्रोपेगेंडा’ के टैग से बचने की इच्छा, कोई पॉलिटिकल पर्दादारी या संकोच दिखाए बिना.
पॉलिटिकल कहानी + कंट्रोवर्सी = ताबड़तोड़ कमाई ? कोई भी फिल्ममेकर इतना नादान नहीं है जिसे ऐसी चॉइस के साथ आने वाली कंट्रोवर्सी का आईडिया पहले से न हो. पर क्या ‘धुरंधर 2’ में ये चॉइस केवल कमाई के लिए ली गई? ये कहना सरासर गलत होगा क्योंकि कंट्रोवर्सी से कमाने वाला फॉर्मूला असल में आउटडेटेड हो चुका है.













