
दो परिवार, हत्या और एक त्रासद जनाजा... कश्मीर की बर्फ में कैसे पनपा आतंकवाद
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सिख साम्राज्य जम्मू-कश्मीर पर लाहौर से शासन करता था, लेकिन वहां पर उनके डोगरा सामंत राजा गुलाब सिंह और उनके भाई सुचेत सिंह के साथ ध्यान सिंह की अहम भूमिका थी. इस अस्थिरता के दौर में डोगरा शासकों ने अवसरवादी भूमिका निभाई, जो पक्ष उन्हें तात्कालिक लाभ देता दिखा, उसी के साथ हो लिए.
कश्मीर... हिमालय की बर्फीली परत से ढका, पहाड़ों की गोद में बसा और वादियों-घाटियों का सजा-धजा इलाका, इसे देख ऐसा लगे कि खुद प्रकृति भी यहां बैठकर अपना रूप सजाती है. इसी जमीन के लिए कहा गया कि गर फिरदौस बर रुये जमींअस्तो, हमींअस्तो, हमींअस्तो, हमींअस्तो.
लेकिन, कश्मीर पर जो सफेद चादर ढकी दिखती है, वह सिर्फ बर्फ की परत भर नहीं है, यह जादुई है, मायावी है और धोखे-छल, षड्यंत्र से बनी हुई है. ये किसी जादूगर के पर्दे के मानिंद हैं, जो आपकी आंखों से ही काजल चुरा लेता है, देखते-देखते दृश्य बदल देता है और हकीकत को छिपा देता है. ये मायावी पर्दा, कोई आजकल या परसों का नहीं पड़ा है इसका दो सदियों का बेहद दुखद इतिहास है जो कश्मीर की किस्मत बन गया है. इस मायावी पर्दे के पीछे शक्तिशाली ताकतें गुप्त रूप से अपने हितों के अनुसार चालें चलती रहीं, और उनके असली इरादे तब तक उजागर नहीं होते, जब तक सब कुछ तयशुदा दिशा में नहीं बढ़ जाता.
वैसे ये कहानी न जाने कितने पहले से शुरू हो गई थी, लेकिन अभी हम इसे वहां से शुरू करते हैं, जहां से महाराजा रणजीत सिंह का निधन होता है. समेंसाल था 1839, महाराजा रणजीत सिंह की लंबी बीमारी के बाद मृत्यु हो गई. वे एक विशाल साम्राज्य के शासक थे, जि जम्मू और कश्मीर भी शामिल था. उनकी मृत्यु के बाद उनके परिवार में उत्तराधिकार को लेकर संघर्ष शुरू हो गया, जिसने षड्यंत्रों, महल की साजिशों और हत्याओं को जन्म दिया. इसी दौरान अंग्रेजों और सिखों के बीच संघर्ष छिड़ा और अंततः सिख हार गए.
सिख साम्राज्य जम्मू और कश्मीर पर लाहौर से शासन करता था, लेकिन वहां पर उनके डोगरा सामंत राजा गुलाब सिंह और उनके भाई सुचेत सिंह व ध्यान सिंह की अहम भूमिका थी. इस अस्थिरता के दौर में डोगरा शासकों ने अवसरवादी भूमिका निभाई, जो पक्ष उन्हें तात्कालिक लाभ देता दिखा, उसी के साथ हो लिए.

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