
दुनिया में बढ़ेगा परमाणु युद्ध का खतरा! 16 साल बाद खत्म हो रही अमेरिका-रूस की न्यूक्लियर डील
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अमेरिका और रूस के बीच आखिरी परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता न्यू स्टार्ट खत्म हो रहा है. 50 साल बाद पहली बार ऐसा होगा जब दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु ताकतों पर कोई सीमा नहीं रहेगी, जिससे नई हथियारों की रेस और वैश्विक खतरे बढ़ सकते हैं.
दुनिया एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है. अमेरिका और रूस के बीच आखिरी बची परमाणु हथियार नियंत्रण संधि न्यू स्टार्ट (New START) खत्म हो गई है. अगर आखिरी समय पर वॉशिंगटन और मॉस्को के बीच कोई समझौता नहीं होता, तो 50 साल से ज्यादा समय बाद पहली बार ऐसा होगा जब दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु ताकतों पर किसी भी तरह की कानूनी रोक नहीं रहेगी.
न्यू स्टार्ट संधि 2010 में चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में साइन की गई थी. इसके तहत अमेरिका और रूस के परमाणु हथियारों, खासकर तैनात किए गए परमाणु वॉरहेड्स और मिसाइल सिस्टम्स पर सीमा तय की गई थी. हथियार नियंत्रण विशेषज्ञों के मुताबिक यह संधि वैश्विक समयानुसार बुधवार रात 11 बजे के करीब खत्म हो जाएगी.
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1962 के क्यूबा मिसाइल संकट के बाद से दुनिया ने कई हथियार नियंत्रण समझौते देखे, जिनका मकसद परमाणु युद्ध के खतरे को कम करना था. उस दौर को जानकार दुनिया का सबसे खतरनाक समय मानते हैं, जब जानबूझकर परमाणु युद्ध होने की सबसे ज्यादा आशंका थी. न्यू स्टार्ट उसी व्यवस्था की आखिरी कड़ी थी.
पोप लियो ने अमेरिका-रूस से की अपील
संधि खत्म होने से पहले हालात की गंभीरता को देखते हुए पोप लियो ने भी अमेरिका और रूस से अपील की है. अपने साप्ताहिक संबोधन में उन्होंने कहा कि इस समझौते को खत्म होने से बचाया जाना चाहिए. उन्होंने डर और अविश्वास की राजनीति छोड़कर साझा भलाई की सोच अपनाने की जरूरत पर जोर दिया.

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