
दिल्ली विधानसभा सत्र: फेलोशिप हटाने को लेकर प्रस्ताव पास, एक महीने में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
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संजीव झा ने कहा कि फेलोशिप नियुक्ति को रद्द करना विधानसभा के कामकाज में अड़ंगा डालने और बदनाम करने का मामला लगता है. ये अरविंद केजरीवाल के मॉडल आफ गवर्नेंस से घबरा रहे हैं. देश के प्रधानमंत्री तीन बार तक गुजरात के मुख्यमंत्री थे
दिल्ली उपराज्यपाल द्वारा विधानसभा के फेलोशिप हटाए जाने का मुद्दा बुधवार को सदन में उठाया गया. आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि आनन-फानन में फेलोशिप की नियुक्ति को रद्द करना सदन की अवमानना है.
चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के विधायक ने कुछ आंकड़े भी पेश किए और कहा कि फेलोशिप के लिए 2900 लोगों ने आवेदन किया था. दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी ने आवेदकों के इंटरव्यू लिए जो रिसर्च फेलो थे. देश विदेश की यूनिवर्सिटी से पढ़कर आए लोगों को नियुक्ति की गयी. फेलो को विधायकों और मंत्री के साथ अटैच किया गया था. मेरे साथ जुड़ी फेलो ने PHD की थी. फेलो ने विधायकों और मंत्रियों के कामकाज को आसान करने का काम किया.
संजीव झा ने कहा कि फेलोशिप नियुक्ति को रद्द करना विधानसभा के कामकाज में अड़ंगा डालने और बदनाम करने का मामला लगता है. ये अरविंद केजरीवाल के मॉडल आफ गवर्नेंस से घबरा रहे हैं. देश के प्रधानमंत्री तीन बार तक गुजरात के मुख्यमंत्री थे, गुजरात चुनाव में जब हम गुजरात गए तो टीन-टप्पर के स्कूल नजर आए'. इन्हें चिंता है कि दिल्ली का मॉडल कहीं देश भर में सफल न हो जाए, इसलिए हमारे कामकाज में अड़ंगा ड़ालते हैं.
आगे फेलोशिप विवाद में उठे सवालों का जवाब देते हुए आम आदमी पार्टी के विधायक ने कहा 'यह कहा गया कि AAP विधायक संजीव झा के दो भाई फेलोशिप के मेंबर है जो गलत है. झूठी जानकारी के लिए शहजाद पूनावाला, प्रवेश वर्मा और कपिल मिश्रा को मानहानि का नोटिस में भेजा गया है. आम आदमी पार्टी के विधायक दिलीप पाण्डेय का नाम उछाला गया. दुर्गेश पाठक की पत्नी का नाम लिया गया. दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग करने वाले आज दिल्ली सेवा कानून में बदलाव कर अधिकार छीन रहे हैं'.
सदन में विधायक ने बताया कि साल 2018, 2019, 2020 में फाइनेंस डिपार्टमेंट फेलोशिप को सैलरी देता रहा है. साथ ही, संजीव झा ने मांग की कि फेलोशिप की नियुक्ति को रद्द करने वाले तमाम अधिकारियों के खिलाफ और झूठ फैलाने वाले नेताओं के खिलाफ़ अवमानना की कार्रवाई चलनी चाहिए.
वहीं, भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने सदन में फेलोशिप मामले में आम आदमी पार्टी विधायक के प्रस्ताव का विरोध किया. भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि फेलोशिप में एक भी सीट आरक्षित नहीं की गयी थी. पोस्ट क्रिएट नहीं गए और ना रूल बने. पूरे मामले में भाई भतीजावाद तो हुआ है. सरकारी खजाने का सदुपयोग नहीं हुआ. इस अवमानना के प्रस्ताव में कार्रवाई टिक नहीं पाएगी.

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