
दिल्ली में नर्सरी से कक्षा 1 तक एडमिशन 4 दिसंबर से शुरू, जानें पूरी प्रक्रिया
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दिल्ली के 1700+ निजी स्कूलों में नर्सरी, केजी और कक्षा 1 के एडमिशन की प्रक्रिया 4 दिसंबर 2025 से शुरू होगी. शिक्षा निदेशालय ने सेशन 2026-27 का शेड्यूल जारी कर दिया है. एडमिशन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखने के निर्देश दिए गए हैं.
दिल्ली के करीब 1700 से अधिक निजी स्कूलों में नर्सरी, केजी और कक्षा 1 के एडमिशन के लिए आवेदन प्रक्रिया 4 दिसंबर 2025 से शुरू होने जा रही है. शिक्षा निदेशालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए शेड्यूल जारी कर दिया है. एडमिशन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखने के निर्देश दिए गए हैं. निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि ड्रॉ ऑफ लॉट कंप्यूटराइज्ड हो या पर्ची सिस्टम से, यह अभिभावकों की मौजूदगी में किया जाएगा. चयनित छात्रों की पहली लिस्ट 23 जनवरी 2026 को और दूसरी लिस्ट 9 फरवरी 2026 को जारी होगी. सामान्य वर्ग की 75% सीटों पर यह प्रक्रिया लागू होगी, जबकि EWS/Disadvantaged Category के लिए अलग दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे.फीस और रजिस्ट्रेशन स्कूल केवल 25 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस ले सकेंगे. प्रॉस्पेक्टस खरीदना पूरी तरह वैकल्पिक रहेगा. ड्रॉ की तारीख और समय की जानकारी स्कूल को अभिभावकों को कम से कम दो दिन पहले वेबसाइट, नोटिस-बोर्ड या ईमेल के माध्यम से देनी होगी.कैसे करें आवेदन? अभिभावक शिक्षा निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट edudel.nic.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे.जानें आवेदन प्रक्रिया:
Nursery Admission 2026-27: इन डॉक्यूमेंट्स की होगी जरूरत अभिभावक के नाम का राशन कार्ड बच्चे या अभिभावक के नाम का डोमिसाइल प्रमाणपत्र अभिभावक का वोटर आईडी बिजली/पानी/टेलीफोन बिल या बच्चे का पासपोर्ट माता या पिता के नाम का आधार कार्डआयु सीमा (एज क्राइटेरिया) – 31 मार्च 2026 के आधार पर नर्सरी (Pre-School): 3 से 4 वर्ष केजी (Pre-Primary): 4 से 5 वर्ष कक्षा 1: 5 से 6 वर्षदिल्ली सरकार का कहना है कि पारदर्शी और सरल प्रक्रिया के माध्यम से अधिक से अधिक अभिभावकों को राहत मिलेगी और स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी की जाएगी.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












