
दिल्ली: जाली वीजा रैकेट का भंडाफोड़, खाड़ी देशों में नौकरी के नाम पर हो रही थी ठगी
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पुलिस ने आरोपियों के पास से 360 पासपोर्ट, 59 जाली वीजा, एक पिस्टल, लैपटॉप, जाली स्टैंप, मोबाइल फोन और ढाई लाख कैश बरामद किया है. पकड़े गए आरोपियों के नाम अरशद, राम अनमोल, श्रुति और गुलबहार उर्फ शमीम है. ये लोग बेहद कम वक्त में ही अपने ठिकाने बदल देते थे.
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एक जाली वीजा रैकेट का भंडाफोड़ किया है. यह लोग विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर आम लोगों को ठगा करते थे. लोगों से ज्यादा से ज्यादा पैसा लेने के लिए ये लोग पासपोर्ट पर जाली वीजा लगाकर दे देते. इतना ही नहीं उन्हे इस बात का भरोसा भी दिला देते की उन्हे गल्फ कंट्री में नौकरी भी मिल गई है. इस गैंग का सरगना अरशद था. अरशद अरबी भाषा अच्छी तरह से बोल लेता था, इसलिए लोग जल्दी इसके झांसे में आ जाते. पुलिस ने एक महिला श्रुति और अरशद समेत कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
पुलिस ने आरोपियों के पास से 360 पासपोर्ट, 59 जाली वीजा, एक पिस्टल, लैपटॉप, जाली स्टैंप, मोबाइल फोन और ढाई लाख कैश बरामद किया है. पकड़े गए आरोपियों के नाम अरशद, राम अनमोल, श्रुति और गुलबहार उर्फ शमीम है. ये लोग बेहद कम वक्त में ही अपने ठिकाने बदल देते थे. लोगो को फसाने के लिए ये लोग सोशल मीडिया की मदद लेते और फिर ये साथ में एक फेक कॉल सेंटर भी चलाते जहां से लड़कियां फोन करके लोगो को अपने झांसे में फांसती.
आर्थिक अपराध शाखा के डीसीपी जितेंद्र मीणा ने बताया कि पिछले कुछ समय में उन्हें कई ऐसी शिकायतें मिलीं, जिसमें कहा गया कि खाड़ी देशों में नौकरी दिलाने के नाम पर उनके साथ ठगी की गई है और पैसे लेकर उन्हें जाली वीजा थमा दिया गया. जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने अपने दफ्तर पर ताला लगा दिया है और वह कहीं और से ऑपरेट करने लगे हैं. मोबाइल नंबर और बैंक डिटेल के आधार पर पुलिस ने आरोपियों को जनकपुरी इलाके से धर दबोचा.
आरोपी अरशद ने जनकपुरी में प्लेसमेंट एजेंसी के नाम से एक ऑफिस खोला हुआ था और वहीं से अपने पूरे गैंग को ऑपरेट कर रहा था. जब पुलिस की टीम अरशद के ऑफिस पहुंची तो वहां कई लड़के लड़कियां फोन पर लोगों से बात कर रहे थे. इनका एक दफ्तर दिल्ली के कनॉट प्लेस में भी था. पुलिस ने वहां भी छापा मारा.
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह सोशल मीडिया और एजेंट के जरिए लोगों को अपने झांसे में फंसाते थे. खाड़ी देशों में नौकरी दिलाने के नाम पर एक लाख तक लोगों से वसूल लेते थे और फिर जाली वीजा देकर दफ्तर बंद कर गायब हो जाते थे. जांच में पुलिस को पता लगा है कि कुछ लोगों ने अपने जेवर गिरवी रख कर तो कुछ ने तो जमीन बेचकर नौकरी के लालच में इन्हें पैसे दिए थे. पुलिस के मुताबिक अब तक उन्हें 80 पीड़ितों की जानकारी मिली है लेकिन जिस तरीके से इनके पास से दस्तावेज मिले हैं उसे पुलिस को अंदेशा है कि इनकी ठगी के शिकार लोगों की संख्या बड़ी है.

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