
दिल्ली: कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से छात्रा की मौत, दो लापता, मौके पर NDRF मौजूद
AajTak
दिल्ली के राजेंद्र नगर स्थित राव आईएएस कोचिंग सेंटर में पानी भर गया है. जिसके चलते 3 छात्र लापता हो गए हैं. मौके पर फायर सर्विस, NDRF और दिल्ली पुलिस की टीम पहुंच गई और पानी में सर्च अभियान चला रही है.
दिल्ली से हैरान करने वाला मामला सामने आया है. जानकारी के मुताबिक राजेंद्र नगर स्थित राव आईएएस कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भर गया. जिससे एक छात्रा और दो छात्र अंदर फंस गए थे. सूचना पाकर मौके पर पहुंची NDRF ने छात्रा के शव को बरामद कर लिया है. वहीं दोनों छात्र अभी भी लापता हैं.
जानकारी के मुताबिक 7 बजे फायर डिपार्टमेंट को एक कॉल मिली और बताया गया कि कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से तीन छात्र लापता हो गए हैं. दिल्ली पुलिस के सूत्रों का दावा है कि कोचिंग सेंटर में पढ़ने वाले बच्चों के फोन से संपर्क नहीं हो पा रहा है. तीनों लड़कों का फोन पहुंच से बाहर बता रहा है.
यह भी पढ़ें: दिल्ली: राजेंद्र नगर में बीते 2 दिन से प्रदर्शन कर रहे थे UPSC छात्र, पुलिस ने खदेड़ा
भाजपा ने आप विधायक पर लगाया लापरवाही का आरोप
मामले को लेकर दिल्ली भाजपा के पूर्व महामंत्री राजेश भाटिया ने आप विधायक दुर्गेश पाठक पर हमला बोला है. घटना स्थल पहुुंच उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया है. उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के चलते राजेंद्र नगर के कई इलाकों में पानी भर गया है. इसकी शिकायत आप के स्थानीय विधायक से भी की गई, लेकिन उन्होंने पानी निकासी को लेकर कोई काम नहीं किया.
वहीं, शनिवार को यहां स्थित राव आईएएस कोचिंग सेंटर के लाइब्रेरी में पानी भर गया. लाइब्रेरी बेसमेंट में स्थित है. पानी भरने के चलते 3 बच्चे लापता हो गए हैं. हालांकि, सूचना पर NDRF और दिल्ली पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई हैं और तीनों छात्रों को बाहर निकालने की कोशिश कर रही है. मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि तीनों बच्चे सुरक्षित बाहर आए और उनके साथ किसी भी तरह की अनहोनी न हो.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.







