
दिन भर, 29 मार्च: आसमान से गर्त तक कैसे पहुंचा मुख़्तार अंसारी का सियासी रसूख?
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मुख़्तार अंसारी की मौत के बाद गाजीपुर में हालात कैसे हैं, माफिया डॉन से नेता बने इस शख़्स का सियासी सफर कैसा रहा, बिहार के महागठबंधन में पार्टियों के बीच कैसे बात बनी, पूर्णिया सीट के लिए अड़े पप्पू यादव के लिए अब क्या रास्ता है, बांग्लादेशी अवाम ‘इंडिया आउट कैंपेन’ ट्रेंड को लेकर कितना सीरियस है और नई दिल्ली हसीना को बैक कर रही है क्या, सुनिए 'दिन भर' में नितिन ठाकुर से.
कल रात बांदा जेल में माफिया डॉन मुख़्तार अंसारी की मौत हो गई. 5 डॉक्टरों की टीम ने आज शव का पोस्टमॉर्टम किया, लेकिन परिवार संतुष्ट नहीं है. उसने मुख़्तार अंसारी को धीमा जहर देने का आरोप लगाया है और दिल्ली एम्स में पोस्टमॉर्टम की मांग की है. बांदा प्रशासन की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं आया है. वहीं बांदा के चीफ़ जुडिशियल मजिस्ट्रेट ने इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. इसकी रिपोर्ट एक महीने में देनी होगी. जेल में कैदी की मौत के बाद इस तरह की जांच का नियम भी है. फिलहाल, बांदा प्रशासन मुख्तार के शव को स्पेशल रूट लगाकर गाजीपुर भेज दिया है. मंगलवार देर रात बांदा के अस्पताल से मुख़्तार अंसारी ने आखिरी बार अपने बेटे उमर से बात की थी. मुख्तार ने कहा था कि उन्हें बार बार बेहोशी आ रही है और वो बैठ नहीं पा रहे हैं.
गाजीपुर और मऊ वो इलाका जहां आजादी के पहले से अंसारी परिवार की सियासत का सिक्का चलता रहा है. मुख़्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी 5 बार विधायक रहे हैं, वो गाजीपुर से 2 बार सांसद भी चुने गए. उनके सबसे बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी गाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट से विधायक रह चुके हैं. एक वक्त था, जब अंसारी परिवार के 'बड़े फाटक' पर UP के बड़े नेताओं से लेकर सरकारी अधिकारी तक मुख्तार के आगे सिर झुकाए खड़े रहते थे. लेकिन सरकार बदली तो अब हवा भी उल्टी दिशा में बह रही है. बीते 3 साल में अंसारी परिवार से जुड़ी करीब 500 करोड़ से ज्यादा की प्रॉपर्टी पर बुलडोजर चल चुका है. वैसे मुख़्तार अंसारी की राजनीति और अपराध का लंबा इतिहास रहा है. मुख़्तार अंसारी की मौत के बाद गाजीपुर में हालात कैसे हैं और माफिया डॉन से नेता बने इस शख़्स का सियासी सफर कैसा रहा है? सुनिए 'दिन भर' की पहली ख़बर में.
यूपी के बाद दिन भर की गाड़ी को बिहार की तरफ बढ़ाते हैं. लोकसभा चुनाव के लिए सूबे की सभी 40 सीटों के लिए महागठबंधन में सहमति बन गई है. बिहार में महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल , कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां शामिल हैं. लंबी चर्चा के बाद सभी दल एक फॉर्मूले पर पहुंच गए है. आरजेडी के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने आज पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके महागठबंधन की सीट शेयरिंग फॉर्मूला के बारे में जानकारी दी. तय समझौते के तहत राजद 26 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. वहीं कांग्रेस के खाते में 9 सीटें आई हैं. बाकी 5 सीट लेफ्ट पार्टियों के पाले में गई है. हालाँकि इस समझौते से कन्हैया कुमार और पप्पू यादव जैसे नेताओं के हाथ केवल मायूसी ही लगी है. क्योंकि दोनों की सीटें गठबंधन के दूसरे पार्टनर्स के खाते में चली गई है. बिहार के महागठबंधन में कैसे बात बनी और पप्पू यादव के लिए अब क्या रास्ता है? सुनिए 'दिन भर' की दूसरी ख़बर में.
हैश टैग इंडिया आउट, हैश टैग बॉयकॉट इंडिया, हैश टैग बॉयकॉट इंडियन प्रोडक्ट्स.. ये सारे ट्रेंड्स कुछ वक्त पहले मालदीव में चल रहे थे.. और अब सेम यही टैग्स बांग्लादेश में ज़ोर पकड़े हुए हैं. कहानी शुरू हुई थी जनवरी से, जब शेख हसीना एक बार फिर बांग्लादेश की प्राइम मिनिस्टर बनीं. विपक्षी पार्टी बीएनपी.. बांग्लादेश नेशनल पार्टी उनसे तभी से बहुत नाराज़ है. नाराज़ वो भारत से भी है क्योंकि उसने नई दिल्ली पर आरोप लगाया कि वो उन शेख हसीना का समर्थन कर रही है जो बांग्लादेश में डेमोक्रेसी के लिए खतरा बन गई हैं. आपको शायद याद हो बीएनपी ने इलेक्शंस में हिस्सा नहीं लिया था. तो जनवरी से जारी उनका सरकार के खिलाफ विरोध अब इंडिया विरोध में बदलता दिख रहा है. एक सीनियर विपक्षी लीडर रुहुल कबीर रिज़वी ने जलसे में अपनी शॉल फेंकते हुए इंडियन प्रोडक्ट्स के विरोध का नारा उछाला. इसका जवाब बांग्लादेशी पीएम की तरफ से पब्लिकली आया , और कहा- बीएनपी नेता बॉयकॉट इंडियन प्रोडक्ट्स कह तो रहे हैं लेकिन उनमें से कितने नेताओं की पत्नियों के पास हिंदुस्तानी साड़ी होगी.. क्यों नहीं वो उन साड़ियों आग के हवाले करके दिखा दें... हसीना ने ये भी कहा कि कई बीएनपी नेताओं की पत्नियां और बेटियां हिंदुस्तान से साड़ी खरीदकर बांग्लादेश लाकर बेचती हैं. हसीना के इस हमले से बीएनपी नेता रिज़वी बौखला गए और जवाब दिया कि हमारे नेता इतनी भी इंडियन साडी नहीं खरीदते.. बांग्लादेशी आवाम ‘इंडिया आउट कैंपेन’ ट्रेंड के प्रति सीरियस है क्या और नई दिल्ली हसीना को बैक कर रही है क्या? सुनिए 'दिन भर' की आखिरी ख़बर में.

दिल्ली में कांग्रेस द्वारा मनरेगा बचाओ आंदोलन तेज़ी से जारी है. 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय के सामने बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता एकत्रित हुए हैं. यह विरोध प्रदर्शन मनरेगा कानून में किए जा रहे बदलावों के खिलाफ किया जा रहा है. मनरेगा योजना के तहत मजदूरों को रोजगार देने वाली इस योजना में बदलावों को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की है.

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मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मियां मुसलमानों को लेकर फिर से विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि अगर राज्य के मियां मुसलमानों को परेशान करना हो तो वह रात दो बजे तक जाकर भी परेशान कर सकते हैं. इसके साथ ही उन्होंने मियां मुसलमानों को पांच रुपए देने की बजाय चार रुपए देने की बात कह कर विवादों को जन्म दिया है. इसपर पर अब विपक्ष हमलावर है.

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