
'दिक्कत है तो मेरे पास आओ... लेटर वार में मत उलझो', देवेंद्र फडणवीस की अपने मंत्रियों को नसीहत
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शिरसाट और मिसाल के बीच जमीनी जंग छिड़ी हुई है. मिसाल द्वारा आयोजित एक विभागीय बैठक के बाद, शिरसाट ने उन्हें पत्र लिखकर कहा कि उन्हें बैठक बुलाने या विभाग को निर्देश देने का कोई अधिकार नहीं है. मिसाल ने जवाब में लिखा कि वह अपने अधिकारों के दायरे में हैं.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने मंत्रियों से कहा कि वे ‘पत्र युद्ध’ से बचें और किसी भी कठिनाई की स्थिति में उनसे संपर्क करें. उनकी यह टिप्पणी शिवसेना के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट द्वारा भाजपा की राज्य मंत्री माधुरी मिसाल द्वारा उन्हें सूचित किए बिना विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक करने पर आपत्ति जताए जाने के बाद आई है.
देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में संवाददाताओं से कहा, 'किसी को भी यह पत्र युद्ध नहीं छेड़ना चाहिए. मंत्रियों को आपस में बात करनी चाहिए. अगर उन्हें कोई परेशानी है, तो उन्हें आकर मुझे बताना चाहिए, ताकि हम उसका समाधान कर सकें.' उन्होंने कहा, 'आखिरकार, (कैबिनेट) मंत्री और राज्य मंत्री एक ही सरकार का हिस्सा हैं. सारी शक्तियां मंत्री के पास होती हैं. मंत्री जो भी शक्तियां राज्य मंत्रियों को देते हैं, वे राज्य मंत्रियों की होती हैं. इस पर कोई भ्रम नहीं है.'
राज्य मंत्री के पास भी बैठकें बुलाने का अधिकार: फडणवीस
फडणवीस ने कहा, 'हालांकि, यह मानना गलत है कि राज्य मंत्री के पास बैठकें आयोजित करने का अधिकार नहीं है. लेकिन अगर बैठकों में नीतिगत फैसले लिए जाते हैं, तो ऐसे फैसले (कैबिनेट) मंत्री से सलाह लिए बिना नहीं लिए जा सकते. और अगर फिर भी लिए जाते हैं, तो उन्हें मंत्री की मंजूरी लेनी होगी.'
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शिरसाट और मिसाल के बीच जमीनी जंग छिड़ी हुई है. मिसाल द्वारा आयोजित एक विभागीय बैठक के बाद, शिरसाट ने उन्हें पत्र लिखकर कहा कि उन्हें बैठक बुलाने या विभाग को निर्देश देने का कोई अधिकार नहीं है. मिसाल ने जवाब में लिखा कि वह अपने अधिकारों के दायरे में हैं. मिसाल ने एक कनिष्ठ मंत्री के रूप में उन्हें दी गई शक्तियों पर मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से स्पष्टीकरण भी मांगा.

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