
तुर्की के स्की रिसॉर्ट में लगी आग, 66 लोगों की मौत, जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदे लोग
AajTak
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि तुर्की के बोलू पहाड़ों में ग्रैंड कार्तल होटल में मंगलवार को भीषण आग लगने से 66 लोगों की मौत हो गई. ये घटना उत्तर-पश्चिमी तुर्की के एक लोकप्रिय गंतव्य कार्तलकाया स्की रिसॉर्ट में सामने आई, जहां उस समय 234 मेहमान ठहरे हुए थे.
तुर्की के बोलू पहाड़ों के ग्रैंड कार्टल होटल में लगी भीषण आग में मंगलवार को 66 लोगों की मौत हो गई और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए. साथ ही आग से घबराए मेहमानों ने जान बचाने के लिए होटल की खिड़कियों से छलांग लगा दी. ये घटना उत्तर-पश्चिमी तुर्की में स्थित एक मशहूर पर्यटन स्थल कार्टालकाया स्की रिजॉर्ट में हुई, जहां उस समय 234 मेहमान रह रहे थे.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि तुर्की के बोलू पहाड़ों में ग्रैंड कार्तल होटल में मंगलवार को भीषण आग लगने से 66 लोगों की मौत हो गई. ये घटना उत्तर-पश्चिमी तुर्की के एक लोकप्रिय गंतव्य कार्तलकाया स्की रिसॉर्ट में सामने आई, जहां उस समय 234 मेहमान ठहरे हुए थे.
'सुबह साढ़े तीन बजे लगी आग'
आग 12 मंजिला होटल के रेस्तरां के फर्श पर सुबह करीब 3.30 बजे लगी, जो तेजी से पूरी बिल्डिंग में फैल गई. चश्मदीदों ने बताया कि होटल में धुआं भर जाने से अफरा-तफरी मच गई और होटल की आग का पता लगाने वाले सिस्टम कथित तौर पर काम करने में विफल रहा.
कूदने से दो लोगों की मौत: गवर्नर
बोलू के गवर्नर अब्दुल अजीज अदीन के अनुसार, दो पीड़ितों की मौत घबराहट में कूदने की वजह से हो गई. होटल में ठहरे लोगों ने ऊपरी मंजिल से नीचे उतरने के लिए बेडशीट की रस्सियों का इस्तेमाल किया, जबकि अन्य लोगों ने आग से बचने के लिए खिड़कियों से लेट गए.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









