
तीन सालों के बाद आदमखोर बाघिन टी-83 को पिंजरे में कैद कर सकी टीम, लोगों ने ली राहत की सांस
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महाराष्ट्र के चंद्रपुर (Chandrapur) में तीन साल तक आतंक मचाने वाली आदमखोर बाघिन टी-83 को आखिरकार वन विभाग की टीम ने पिंजरे में कैद कर लिया. इस बाघिन ने पिछले तीन वर्षों में 11 लोगों की जान ली थी, जिससे स्थानीय लोग बेहद डर और तनाव में जी रहे थे. टी-83 बाघिन के पकड़े जाने के बाद अब इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली है.
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले (Chandrapur) के चिचपल्ली वन क्षेत्र में तीन साल में 11 लोगों की जान लेने वाली बाघिन को आखिरकार पकड़ लिया गया है. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाघिन टी-83 को शनिवार की सुबह जनाला इलाके के कंपार्टमेंट नंबर 717 से बेहोश कर पिंजरे में बंद किया गया.
एजेंसी के अनुसार, टी-83 बाघिन पिछले तीन वर्षों से मुल तहसील के बफर और संरक्षित क्षेत्रों में घूम रही थी. इस दौरान कई बार वन विभाग की कोशिशों के बावजूद पकड़ में नहीं आ पाई थी. वन विभाग ने पहले भी बाघिन को पकड़ने के लिए कई जगहों पर पिंजरे लगाए थे, लेकिन हर बार वह बच निकलती थी.
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इस ऑपरेशन में वन विभाग की एक विशेष टीम ने रेस्क्यू की तैयारी की, जिसमें पशु चिकित्सक के साथ ही अनुभवी कर्मचारी शामिल थे. ऑपरेशन के दौरान एक शूटर ने बाघिन को बेहोश किया, जिसके बाद उसे पिंजरे में बंद किया गया.
चंद्रपुर जिले के सीनियर फॉरेस्ट ऑफिसर ने कहा कि यह बड़ी राहत की बात है कि तीन साल के लंबे इंतजार के बाद इस खतरनाक बाघिन को पकड़ने में सफलता मिली है. बाघिन को पकड़ना जरूरी था, क्योंकि वह पिछले कुछ साल से स्थानीय लोगों के लिए खतरा बन चुकी थी. बाघिन ने क्षेत्र में आतंक का माहौल बना रखा था. वन विभाग की टीमों ने महीनों की कड़ी मेहनत और कोशिशों के बाद इस खतरनाक बाघिन को काबू में किया.
पिंजरे में बंद किए जाने के बाद बाघिन को चंद्रपुर जिले में सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है, जहां उसकी निगरानी की जाएगी. स्थानीय लोग इस रेस्क्यू के बाद काफी राहत महसूस कर रहे हैं, क्योंकि पिछले तीन वर्षों में इस बाघिन के हमले से पूरा इलाका भयभीत था.

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