
तालिबानी बूमरैंग... पाकिस्तान आर्मी की ‘जिहाद फैक्ट्री’ को आ गया स्वाद
AajTak
पाकिस्तान ने जो जिहादी फौज दशकों पहले मदरसों से तैयार की थी, वही आज उसकी छाती पर सवार है. तालिबान अब उसके इशारे नहीं मानता. टीटीपी के साथ मिलकर पाक आर्मी को घेर रहा है. आसिम मुनीर पश्चिमी और पूर्वी सीमा पर जंग का ढोल पीटकर कुर्सी बचा रहे हैं, लेकिन यह बूमरैंग अब रुकने वाला नहीं. पुराना खेल उल्टा पड़ गया है.
बीती रात पाकिस्तान ने काबुल, कंधार और पक्तिया में एयर स्ट्राइक कर दी. अफगानिस्तान की तरफ से जवाब आया. आज दिन में तालिबान ने पाकिस्तान के अंदर ड्रोन हमले किए. वो भी पाकिस्तान के तीन सैन्य ठिकानों पर. खबर तो यहां तक आई कि एक अटैक इस्लामाबाद में प्राइम मिनिस्टर ऑफिस से पांच किमी दूर ही हुआ. दोनों देशों के बीच पिछले कुछ महीनों से चली आ रही तीखी बयानबाजी और झड़प अब ’ओपन वार‘ का रूप ले चुकी है. लेकिन, इस दुश्मनी की जड़ पुरानी है. करीब-करीब तब से जब दोनों देशों के बीच डूरंड लाइन खींची गई थी. 1893 से इसे लेकर दोनों तरफ से खींचतान चली आ रही है.
तालिबान इसे मानता नहीं. वही तालिबान, जिसे पाकिस्तान आर्मी ने जिहादी फौज के रूप में जन्म दिया था. पाक आर्मी ने अफगानिस्तान से रूस के पैर उखड़ने के बाद तालिबान का वहां पौधारोपण किया था. जिसने अमेरिका के खिलाफ पाकिस्तान के इशारे पर मोर्चे लिए और आखिर में उसे फतेह भी मिली. लेकिन, अफगानिस्तान की सत्ता हाथ आने के बाद तालिबान ने पाकिस्तानी आर्मी के इशारे पर चलने से इनकार कर दिया है. जब रावलपिंडी, यानी पाकिस्तान आर्मी हेडक्वार्टर को यह नागवार गुजरा तो कलह शुरू हो गई. अब पाकिस्तानी आर्मी का बनाया तालिबान उसी पर बूमरैंग हो रहा है. तालिबान और पाकिस्तान आर्मी के रिश्तों में कई परतें हैं. जिस मिठास है, तो खटास भी. दोस्ती है, तो दुश्मनी भी.
इसलिए, तालिबान और पाकिस्तान के रिश्ते को 3 चैप्टर में समझा जा सकता है. पहले चैप्टर में दोनों देशों की सेनाओं का मिलान है. अफगानिस्तान के पास क्या हथियार हैं और वह पाकिस्तान से किस स्तर पर लड़ सकता है. दूसरा चैप्टर पाकिस्तान के पुराने खेल पर है. कैसे उसने पाकिस्तानी मदरसों में जिहाद के नाम पर कट्टरपंथियों की फौजी बनाई और तालिबान को तैयार किया. और तीसरा चैप्टर पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के वार गेम पर है. जो अपनी कुर्सी मजबूत करने के लिए खूनी खिलवाड़ करने में कोताही नहीं कर रहे हैं.
पहला चैप्टर: किसमें कितना है दम...
पाकिस्तान की सेना दुनिया में टॉप 15 में गिनी जाती है. ग्लोबल फायर पावर 2026 की रैंकिंग में पाकिस्तान 14वें नंबर पर है. उसके पास करीब 6 लाख 60 हजार एक्टिव सैनिक हैं. हवाई जहाज सैकड़ों में हैं. टैंक और तोपें भी भरपूर हैं. न्यूक्लियर हथियार भी हैं. करीब 170 वॉरहेड. बजट भी बड़ा है. पाकिस्तान की सेना आधुनिक हथियारों से लैस है. एफ-16 जैसे लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और मिसाइलें सब कुछ है.
दूसरी तरफ अफगानिस्तान की तालिबान फौज का हाल अलग है. उसके पास करीब 1 लाख 72 हजार सक्रिय लड़ाके हैं. योजना है इसे 2 लाख तक बढ़ाने की. लेकिन हथियारों की हालत खराब है. कोई फाइटर जेट नहीं है. हवाई ताकत नाम को भी नहीं. सिर्फ छह पुराने विमान और 23 हेलीकॉप्टर हैं. ज्यादातर सोवियत जमाने के. कई उड़ भी नहीं पाते. रखरखाव का इंतजाम नहीं. अमेरिका के छोड़े गए हथियारों पर निर्भर हैं. 2021 में जब अमेरिका वहां से गया तो 7 अरब डॉलर के हथियार तालिबान के हाथ लगे. M16 राइफलें, हमवी गाड़ियां, नाइट विजन गॉगल्स, कुछ टैंक और APC. सोवियत काल के T-55 और T-62 टैंक भी हैं. करीब सौ T-55 और सौ ही T-62. लेकिन कितने काम के हैं, यह तय नहीं.

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मिडिल ईस्ट वॉर से भी पहले से जंग चल रही है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार टीटीपी जैसे आतंकी समूहों को पनाह दे रही है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं. लेकिन तालिबान ने इन आरोपों को खारिज किया है. दोनों देशों का झगड़ना चीन के हितों के खिलाफ जा रहा है जिसे देखते हुए उसने एक प्रस्ताव रखा था. पाकिस्तान ने सामने से उसे खारिज कर दिया है.

भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना भारतीय दूतावास की अनुमति और संपर्क के किसी भी जमीनी सीमा को पार करने की कोशिश न करें. दूतावास ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने पर लोगों को गंभीर लॉजिस्टिक और इमीग्रेशन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. यह सलाह अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच जारी की गई है. दूतावास ने भारतीयों से आधिकारिक संपर्क में रहने और हेल्पलाइन नंबरों पर मदद लेने की अपील की है. दूतावास ने कहा, 'हमें बताए बिना ईरान न छोड़ें'. दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 17वां दिन है. हर दिन बीतने के साथ ये जंग और भीषण होती जा रही है क्योंकि अब अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए ईरान ने एडवांस मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. 28 फरवरी से चल रहे युद्ध में ईरान ने पहली बार अपनी सबसे आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक सेजिल से इजरायल को टारगेट किया है. सेजिल मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर है, इसी वजह से इसे डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है. ईरान की ओर से सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल होने से युद्ध में और तेजी आने का साफ संकेत मिल रहा है.

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल के शहर तेल अवीव पर मिसाइल हमला हुआ है. सोशल मीडिया और सीसीटीवी फुटेज में वो पल कैद हुआ है जब ईरान की मिसाइल तेल अवीव की एक सड़क पर आकर गिरती दिखाई देती है. इज़रायल पुलिस के मुताबिक इस हमले में क्लस्टर वारहेड का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छोटे बम अलग-अलग जगहों पर गिरकर फटे और आसपास के कई इलाकों को नुकसान पहुंचा. देखें वीडियो.

क्या ईरान युद्ध में अमेरिका फंस गया है? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ट्रंप के लिए अब बड़ी चुनौती बन गया है. ट्रंप दावे तो बहुत करते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि होर्मुज समुद्री मार्ग अभी भी बंद है. ईरान जिसे चाहता है उसके जहाज जाने देता है. बिना ईरान की सहमति के कोई जहाज वहां से नहीं निकल सकता. देखें श्वेता सिंह की ये रिपोर्ट.








