
तारिक रहमान बने बांग्लादेश के पीएम, लेकिन असली बाजी मार गए मोहम्मद यूनुस?
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बांग्लादेश की राजनीति में जो उथल-पुथल जुलाई-अगस्त 2024 में शुरू हुई, छात्रों का एंटी-कोटा आंदोलन, फिर वही आंदोलन सरकार बदलने की मुहिम में बदला, हिंसा हुई, शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी और अचानक मोहम्मद यूनुस अंतरिम प्रशासन के मुखिया बनकर सामने आए, ये सब बहुत तेजी से हुआ.
जब सबकी नजरें खालिदा जिया और शेख हसीना की सियासी टक्कर पर टिकी थीं, तभी बांग्लादेश में एक और बड़ा खेल चल रहा था. एक तरफ थीं प्रधानमंत्री शेख हसीना, दूसरी तरफ नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस जिनके पास कुर्सी नहीं थी लेकिन असर था. अब खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली है लेकिन बीते 18 महीनों में अगर कोई सबसे बड़ा विजेता बनकर उभरा है, तो वो हैं यूनुस.
दरअसल, बांग्लादेश की राजनीति में जो उथल-पुथल जुलाई-अगस्त 2024 में शुरू हुई, छात्रों का एंटी-कोटा आंदोलन, फिर वही आंदोलन सरकार बदलने की मुहिम में बदला, हिंसा हुई, शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी और अचानक मोहम्मद यूनुस अंतरिम प्रशासन के मुखिया बनकर सामने आए, ये सब बहुत तेजी से हुआ. सितंबर 2024 में यूनुस ने खुद कहा था कि हसीना को हटाने का आंदोलन 'बहुत सोच-समझकर तैयार किया गया' था.
यूनुस की 18 महीनों की पारी
85 साल के यूनुस ने 18 महीनों तक अंतरिम प्रशासन की कमान संभाली. इस दौरान उन्होंने कई बड़े फैसले किए जैसे राष्ट्रपति अध्यादेशों के जरिए कानून पास कराए, अमेरिका के साथ ट्रेड डील साइन की, फरवरी 2026 में चुनाव कराने का ऐलान किया (जबकि सेना प्रमुख दिसंबर 2025 चाहते थे) और आखिरकार चुनाव करा भी दिए.
12 फरवरी के चुनाव में बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) ने जीत दर्ज की और अब तारिक रहमान प्रधानमंत्री बन गए हैं. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि यूनुस ने ये चुनाव शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को बाहर रखकर कराया और पश्चिमी देशों से इसे 'इनक्लूसिव' यानी समावेशी चुनाव की मान्यता भी दिला दी.
वरिष्ठ पत्रकार स्वदेश रॉय के मुताबिक, 'यूनुस की सबसे बड़ी सफलता यही है कि उन्होंने ऐसे चुनाव कराए, जिसमें कम से कम 40% वोट शेयर वाली ताकत को बाहर रखा गया और फिर भी पश्चिमी लोकतांत्रिक देशों ने उसे स्वीकार कर लिया.'

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