
डिफॉल्ट हुआ अमेरिका तो पूरी दुनिया में मचेगा हाहाकार, बढ़ी चिंता
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अमेरिका का राजकोष खाली होता जा रहा है और अब वो दिन दूर नहीं जब अमेरिकी ट्रेजरी के पास बिलों का भुगतान करने के लिए पैसे नहीं होंगे. जो बाइडेन की सरकार डिफॉल्ट की स्थिति से बचने के लिए कर्ज लेने की सीमा को बढ़ाना चाहती है लेकिन विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी अड़ंगा डाल रही है.
विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति समझे जाने वाले अमेरिका पर डिफॉल्ट होने का खतरा मंडरा रहा है. राष्ट्रपति जो बाइडेन की सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी और विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी के बीच कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने को लेकर तनातनी की माहौल है. इस बीच विशेषज्ञ चेता रहे हैं कि दोनों पार्टियों के इस राजनीतिक दांव पेच के खेल में अगर अमेरिका डिफॉल्ट कर जाता है तो यह पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी होगा.
अमेरिका ने 19 जून को ही अपने कर्ज लेने की सीमा को पार कर दिया था. तब से यूएस ट्रेजर ने डिफॉल्ट से बचने के लिए कई कदम उठाए हैं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ है और अगर यही हालात बने रहे तो अमेरिका समय पर कर्ज न चुका पाने के कारण कुछ हफ्तों में डिफॉल्ट हो जाएगा.
अमेरिका के डिफॉल्ट होने की कितनी संभावना?
न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर लॉरेंस जे व्हाइट ने अलजजीरा से बातचीत में कहा कि इसे लेकर कोई कुछ नहीं कह सकता क्योंकि यह एक राजनीतिक मुद्दा है.
उन्होंने कहा, 'मैं उम्मीद करता हूं कि कोई हल निकलेगा, लेकिन यह बाज-बटेर का खेल है जिसमें दोनों में से किसी एक पक्ष को झुकना पड़ेगा लेकिन अगर कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं होता तो यह बड़ी चिंता वाली बात हो जाएगी.
डिफॉल्ट से बचने के लिए अमेरिकी संसद को कर्ज की सीमा को बढ़ाना होगा लेकिन रिपब्लिकन पार्टी इसके लिए राजी नहीं हो रही है. उसका कहना है कि जो बाइडेन सरकार पहले अपने खर्च में कटौती करे. इसी कारण कर्ज सीमा बढ़ाने से जुड़ा बिल अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पास नहीं हो पा रहा. ऊपरी सदन में रिपब्लिकन पार्टी के पास बहुमत है और वो बिल को पास होने से रोक रही है.

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