
'ट्रंप से पीएम मोदी ही नहीं, भारतीय जनता भी नाराज', अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे पर पूर्व भारतीय राजदूत की दो टूक
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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को एक बैठक के दौरान कहा था कि उनके और पीएम मोदी के बीच निजी संबंध अच्छे हैं, लेकिन व्यापारिक और रणनीतिक मोर्चे पर पीएम मोदी उनसे नाराज हैं. इस पर संयुक्त राष्ट्र (जेनेवा) में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि दिलीप सिन्हा की कड़ी प्रतिक्रिया आई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत को लेकर दिए गए हालिया बयान ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है. जहां ट्रंप ने दावा किया कि पीएम मोदी रूस से तेल खरीदने के कारण उन पर लगाए गए टैरिफ से खुश नहीं हैं, वहीं अब इस पर कड़ी प्रतिक्रिया आई है. संयुक्त राष्ट्र (जेनेवा) में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि दिलीप सिन्हा ने ट्रंप के दावों को वास्तविकता से परे बताते हुए उन्हें आईना दिखाया है.
दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को एक बैठक के दौरान कहा था कि उनके और पीएम मोदी के बीच निजी संबंध अच्छे हैं, लेकिन व्यापारिक और रणनीतिक मोर्चे पर पीएम मोदी उनसे नाराज हैं. ट्रंप के अनुसार, भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के फैसले के कारण अमेरिका ने उन पर ऊंचे टैरिफ लगाए हैं. ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत को मुझे खुश करना जरूरी है और चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमेरिका भारत पर टैरिफ और भी तेजी से बढ़ा सकता है.
ट्रंप के इस बयान पर पूर्व राजदूत दिलीप सिन्हा ने कहा कि ट्रंप का यह कहना कि 'मोदी खुश नहीं हैं', एक बहुत ही हल्का बयान (Understatement) है. उन्होंने स्पष्ट किया कि न केवल प्रधानमंत्री, बल्कि भारत की जनता भी ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ है.
दिल्ली में न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में दिलीप सिन्हा ने कहा, “मुझे कहना होगा कि राष्ट्रपति ट्रंप का ह्यूमर सेंस बहुत अच्छा है. यह कहना कि प्रधानमंत्री मोदी खुश नहीं हैं, एक तरह से कमतर आकलन है. एक प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी सार्वजनिक रूप से तीखे बयान नहीं दे सकते, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि भारत की जनता की भावना को नजरअंदाज किया जाए. भारत में जनमत राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ बेहद मजबूत है और इसके पीछे ठोस कारण हैं."
'भारत पर लगाए गए टैरिफ को अत्यंत अनुचित'
दिलीप सिन्हा ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को अत्यंत अनुचित बताते हुए कहा कि अमेरिका ने किसी भी देश के मुकाबले भारत पर सबसे ऊंचे टैरिफ लगाए हैं. उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय कंपनियां रूस के मामले में अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का भी पालन कर रही हैं, जबकि ये प्रतिबंध खुद संयुक्त राष्ट्र के नियमों के खिलाफ हैं.

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