
ट्रंप ने NATO पर बोला झूठ? अफगान जंग से जुड़े आंकड़े चिल्ला-चिल्ला के खोल रहे पोल
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अफगानिस्तान में नाटो के तहत मुख्य रूप से दो बड़े अभियान चले थे, जिनमें ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस, पोलैंड, डेनमार्क सहित दर्जनों देशों के हजारों सैनिकों ने हिस्सा लिया था.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि अफगानिस्तान में 20 वर्षों तक चले युद्ध के दौरान नाटो देशो की सेनाएं अग्रिम मोर्चे से दूर रही थीं. ट्रंप के इस बयान पर यूरोपीय देश भड़के हुए हैं. जबकि हकीकत ये है कि अफगानिस्तान में सेवा के दौरान सिर्फ अमेरिकी सैनिक ही नहीं थे जो अपनी जान को दांव पर लगा रहे थे.
अफगानिस्तान में मारे गए सबसे कम उम्र के ब्रिटिश सैनिक की मां का कहना है कि उनका बेटा सिर्फ 18 साल का था, जब वह अपने साथियों की जान बचाने की कोशिश में एक धमाके में मारा गया.
9/11 हमले के बाद अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों ने 2001 में अफगानिस्तान पर चढ़ाई की थी, जिसके लिए नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी के आर्टिकल 5 को लागू किया गया. इसके तहत किसी एक नाटो सदस्य पर हमला, सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है. साल 2014 तक जब औपचारिक युद्ध अभियान समाप्त हुए और उसके बाद भी नाटो देशों की सेनाएं अमेरिकी फौजों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ीं और इसकी भारी कीमत पैसों के साथ-साथ जान की कुर्बानी के रूप में चुकाई.
ऐसे में ट्रंप के बयान ने न सिर्फ नाटो के अमेरिकी सहयोगियों को नाराज किया, बल्कि यूरोप के पूर्व सैनिकों को भी आहत किया. यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर पहले ही धमकियां दे चुके हैं.
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2001 में करीब 38 नाटो देशों ने अफगान युद्ध में हिस्सा लिया था. हालांकि सैन्य ताकत और संख्या के लिहाज से अमेरिका का दस्ता सबसे बड़ा रहा. 2011 में अफगानिस्तान में नाटो सैनिकों की संख्या अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचकर लगभग 1,40,000 थी, जिसके बाद युद्ध अभियानों के सिमटने के साथ यह संख्या घटती चली गई.
इस युद्ध में सबसे अधिक अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई लेकिन कई यूरोपीय देशों ने जिनकी आबादी अमेरिका की तुलना से कहीं कम है. अनुपात के हिसाब से इन यूरोपीय देशों ने उतना ही नुकसान झेला. 20 साल चले इस युद्ध में, जिसका मकसद अलकायदा को खत्म करना और तालिबान शासन को हटाना था. इस दौरान लगभग 3,500 सैनिक मारे गए. इनमें अमेरिका के 2,456 और ब्रिटेन के 457 सैनिक शामिल थे. अगर तुलना करें तो डेनमार्क जिसकी आबादी अमेरिका के मैसाचुसेट्स जैसे राज्य से भी कम है. डेनमार्क के लगभग 50 सैनिकों की मौत हुई, जो प्रति व्यक्ति आंकड़ों में अमेरिका के बराबर है.

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मिडिल ईस्ट वॉर से भी पहले से जंग चल रही है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार टीटीपी जैसे आतंकी समूहों को पनाह दे रही है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं. लेकिन तालिबान ने इन आरोपों को खारिज किया है. दोनों देशों का झगड़ना चीन के हितों के खिलाफ जा रहा है जिसे देखते हुए उसने एक प्रस्ताव रखा था. पाकिस्तान ने सामने से उसे खारिज कर दिया है.

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