
'ट्रंप ने दिखा दिया असली रंग...', क्या इजरायल-US के हमले से ईरान को बचाएगा रूस?
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अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद रूस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर अपना
अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमले के बाद वैश्विक राजनीति में उबाल आ गया है. राजधानी तेहरान में कई धमाकों और पूरे ईरान में हमलों की खबरों के बीच रूस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि ट्रंप ने एक बार फिर अपना "असली रंग" दिखा दिया है.
रूस के मेदवेदेव ने तंज कसते हुए कहा कि खुद को "शांति निर्माता" बताने वाले ट्रंप ने फिर सैन्य रास्ता चुना है. उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को ईरान के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया. शुरुआती हमले की खबर तेहरान से आई, जहां सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के कार्यालय के पास धमाके होने की सूचना मिली. ईरानी मीडिया के मुताबिक देश के कई हिस्सों में हवाई हमले हुए और राजधानी के ऊपर धुएं के गुबार देखे गए.
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ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान में "बड़े सैन्य अभियान" शुरू कर दिए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान लगातार अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है और ऐसी मिसाइलें विकसित कर रहा है जो अमेरिका तक पहुंच सकती हैं. ट्रंप का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिकी जनता की सुरक्षा के लिए जरूरी थी.
रूस ने हालांकि, इस पूरे अभियान को खतरनाक और अस्थिर करने वाला कदम बताया है. मेदवेदेव के बयान को मॉस्को की कड़ी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है. विश्लेषकों का मानना है कि रूस का यह रुख संकेत देता है कि वह ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का खुलकर समर्थन नहीं करेगा और कूटनीतिक मोर्चे पर अमेरिका को घेरने की कोशिश कर सकता है.
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अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मिडिल ईस्ट वॉर से भी पहले से जंग चल रही है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार टीटीपी जैसे आतंकी समूहों को पनाह दे रही है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं. लेकिन तालिबान ने इन आरोपों को खारिज किया है. दोनों देशों का झगड़ना चीन के हितों के खिलाफ जा रहा है जिसे देखते हुए उसने एक प्रस्ताव रखा था. पाकिस्तान ने सामने से उसे खारिज कर दिया है.

भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना भारतीय दूतावास की अनुमति और संपर्क के किसी भी जमीनी सीमा को पार करने की कोशिश न करें. दूतावास ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने पर लोगों को गंभीर लॉजिस्टिक और इमीग्रेशन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. यह सलाह अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच जारी की गई है. दूतावास ने भारतीयों से आधिकारिक संपर्क में रहने और हेल्पलाइन नंबरों पर मदद लेने की अपील की है. दूतावास ने कहा, 'हमें बताए बिना ईरान न छोड़ें'. दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 17वां दिन है. हर दिन बीतने के साथ ये जंग और भीषण होती जा रही है क्योंकि अब अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए ईरान ने एडवांस मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. 28 फरवरी से चल रहे युद्ध में ईरान ने पहली बार अपनी सबसे आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक सेजिल से इजरायल को टारगेट किया है. सेजिल मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर है, इसी वजह से इसे डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है. ईरान की ओर से सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल होने से युद्ध में और तेजी आने का साफ संकेत मिल रहा है.

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल के शहर तेल अवीव पर मिसाइल हमला हुआ है. सोशल मीडिया और सीसीटीवी फुटेज में वो पल कैद हुआ है जब ईरान की मिसाइल तेल अवीव की एक सड़क पर आकर गिरती दिखाई देती है. इज़रायल पुलिस के मुताबिक इस हमले में क्लस्टर वारहेड का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छोटे बम अलग-अलग जगहों पर गिरकर फटे और आसपास के कई इलाकों को नुकसान पहुंचा. देखें वीडियो.

क्या ईरान युद्ध में अमेरिका फंस गया है? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ट्रंप के लिए अब बड़ी चुनौती बन गया है. ट्रंप दावे तो बहुत करते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि होर्मुज समुद्री मार्ग अभी भी बंद है. ईरान जिसे चाहता है उसके जहाज जाने देता है. बिना ईरान की सहमति के कोई जहाज वहां से नहीं निकल सकता. देखें श्वेता सिंह की ये रिपोर्ट.








