
ट्रंप की बचकानी आदत! पहले मोदी और अब जिनपिंग के साथ कर दी ये हरकत
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक आदत है, किसी भी नेता से हुई बातचीत को बढ़ा-चढ़ाकर तुरंत अपने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर देना. उनकी इस आदत से संबंधित देश मुश्किल में पड़ जाते हैं. पहले उन्होंने भारत के साथ ऐसा किया और अब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत को लेकर कुछ ऐसा पोस्ट किया है जिसपर बातें हो रही हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कम से कम एक बात पर लगातार कायम रहे हैं- पहले पोस्ट करने की अपनी आदत पर. अति उत्साही 'ट्रैम्पोलिन' ट्रंप बातचीत के बाद सबसे पहले ऐलान करना चाहते हैं, चाहे वो घोषणा फैक्चुअली सही हो या नहीं, या फिर दोनों पक्षों में उस पर सहमति बनी हो या नहीं. भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भी ट्रंप की इसी आदत का शिकार होना पड़ा है. ट्रंप ने शी के साथ अपनी फोन पर हुई बातचीत को लेकर ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया और चीन ने इस बातचीत पर आधिकारिक बयान जारी किया तो दोनों के बयानों में अंतर साफ नजर आया.
4 फरवरी को ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'बेहद शानदार टेलीफोन बातचीत' बताया. अपनी तेज-तर्रार स्टाइल में ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर उन तमाम विषयों की जानकारी दे दी, जिन पर दोनों नेताओं के बीच कथित तौर पर चर्चा हुई थी.
इसमें चीन का अमेरिकी कृषि उत्पादों, विमानन और ऊर्जा उत्पादों की खरीद जैसे दावे भी शामिल थे. हालांकि, चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बातचीत का जो आधिकारिक ब्योरा दिया, उसमें ट्रंप के इन अधिकांश दावों का कोई जिक्र नहीं था. शिन्हुआ के मुताबिक, ट्रंप ने ताइवान को लेकर चीन की चिंताओं को स्वीकार किया और बातचीत में पूरी तरह शी जिनपिंग का पक्ष हावी रहा.
पीएम मोदी के साथ बातचीत के बाद भी ट्रंप ने यही किया था
शी के साथ बातचीत के बाद ट्रंप का यह रवैया काफी हद तक वैसा ही था, जैसा रविवार को प्रधानमंत्री मोदी से बात करने के बाद था. तब भी उन्होंने आगे बढ़कर यह घोषणा कर दी थी कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील फाइनल हो चुकी है.
हम पहले ही लिख चुके हैं कि भारत और अमेरिका के बीच न तो कोई ठोस व्यापार समझौता हुआ था और न ही इसकी बातचीत पूरी होने का औपचारिक ऐलान किया गया था. इसके बावजूद, ट्रंप ने ट्रैम्पोलिन पर उछलते बच्चे की तरह जल्दबाजी दिखाई और ट्रुथ सोशल पर यह दावा कर दिया कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा, अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में निवेश करेगा, अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदेगा और अमेरिकी आयात पर सभी टैरिफ खत्म करेगा.

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