
ट्रंप की अपनी ही सेना पर 'सर्जिकल स्ट्राइक', ये है ईरान वॉर का नया चैप्टर
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ईरान जंग के बीच ट्रंप ने अमेरिकी सेना प्रमुख रैंडी जॉर्ज को फायर कर दिया. टॉप आर्मी जनरल को तत्काल प्रभाव से रिटायर होने का कहकर अमेरिकी प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जंग पेंटागन नहीं, व्हाइट हाउस की मर्जी से लड़ी जाएगी.
ट्रंप प्रशासन ने अपनी 'तोप' का मुंह ईरानी सेना के बाद अपनी ही सेना की ओर मोड़ दिया है. अमेरिका के आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज को "तत्काल प्रभाव" से रिटायर होने के लिए कह दिया गया है. यह कोई सामान्य विदाई नहीं, बल्कि एक झटके में किया गया निष्कासन है. इससे पहले चेयरमैन ऑफ जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ जनरल सीक्यू ब्राउन को भी उनके पद से हटाया जा चुका है. दुनिया की सबसे ताकतवर सेना के दो सबसे बड़े सिरों को युद्ध के बीच में काट देना, वाशिंगटन की सत्ता के गलियारों में आए किसी भूकंप से कम नहीं है.
घरेलू मोर्चे पर ट्रंप की इस फायरिंग को लेकर पहले से कयास लगाए जा रहे थे. खासतौर पर बेनतीजा होती ईरान जंग की झुंझलाहट और पेंटागन के भीतर सुलगते असंतोष से इसे जोड़कर देखा जा रहा है. सवाल यह है कि जब खाड़ी में युद्ध की आग धधक रही हो, तब ट्रंप प्रशासन ने इतना बड़ा जोखिम लेकर क्या संदेश दिया है? क्योंकि, इस कदम से न केवल मिलिट्री लीडरशिप में अस्थिरता का खतरा है, बल्कि मोर्चे पर तैनात फौज के मनोबल टूटने का भी बड़ा रिस्क है.
यूएस डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेग्सेथ ने रैंडी जॉर्ज से व्यक्तिगत रूप से रिटायर होने के लिए कहा है. पेंटागन के प्रवक्ता शीन पारनेल ने इस खबर पर मुहर लगाते हुए कहा कि 41वें चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ से पद छोड़ने और तत्काल रिटायर होने के लिए कहा गया है. याद रहे कि जनरल जॉर्ज को 2023 में जो बाइडन द्वारा इस पद पर नियुक्त किया गया था. ट्रंप के समर्थकों के लिए वे 'बाइडन काल के अवशेष' थे.
टॉप आर्मी जनरलों की इस 'फायरिंग' की गहराई को समझने के लिए हमें इसे तीन प्रमुख रणनीतिक चश्मों से देखना होगा:
1. ईरान युद्ध का बदलता गियर: 'स्टोन एज' की ओर कदम
युद्ध के बीच में आर्मी चीफ को हटाना आत्मघाती भी हो सकता है और क्रांतिकारी भी. विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे ट्रंप के दो साफ संकेत हैं:

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