
टैरिफ वॉर जीतेगा कौन? ट्रंप के एक ऐलान के जवाब में चीन के 4 कदम, जानिए कौन किस पर कितना निर्भर
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वैश्विक अर्थव्यवस्था की दुनिया में किसी देश की इकोनॉमी आजाद होने का दावा नहीं कर सकती है. हर एक देश की अर्थव्यवस्था अपने व्यापारिक साझीदार पर निर्भर है. लेकिन सत्ता में आने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति के कदम दुनिया को डरा रहे हैं. उन्होंने चीन के खिलाफ टैरिफ लगाकर क्रिया प्रतिक्रिया की एक श्रृंखला शुरू कर दी है, जो टैरिफ वॉर में बदलता दिख रहा है.
मंगलवार को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स की टॉप थ्री खबरें कुछ इस तरह थीं. 1-अमेरिका से आयात की जाने वाले सामानों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाएगा चीन. 2-चीन की बाजार नियामक संस्था ने एकाधिकार कानूनों के संदिग्ध उल्लंघन के लिए गूगल की जांच शुरू की. बता दें कि गूगल अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी है. 3-चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने दो अमेरिकी कंपनियों को अविश्वसनीय कंपनियों की लिस्ट में डाला. ये कंपनियां हैं पीवीएच ग्रुप और इलूमिना. चीन का कहना है कि उसने अपनी संप्रभुता, सुरक्षा के हित में ये कदम उठाए हैं.
ग्लोबल टाइम्स की ये सुर्खियां बताती है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के आने के बाद चीन और अमेरिका के बीच टैरिफ वॉर शुरू हो चुका है. अगर दोनों देश इस विवाद को नहीं सुलझाते हैं तो ये टैरिफ वॉर एक पूर्ण व्यापार युद्ध में बदल सकता है.
चीन की ओर से ये तीन घोषणाएं तब हुईं जब इससे पहले 1 फरवरी को अमेरिका ने चीन से होने वाले सभी आयात पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की. ये घोषणा ट्रंप की उस नीति का हिस्सा है जहां उनकी सरकार ये मानती है कि चीन अमेरिका से सामान के आयात पर अतार्किक कर लगाता है.
व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि 10 प्रतिशत टैरिफ मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त चीन से होने वाले सभी आयातों पर लगाया गया है. इसका अर्थ ये हुआ कि चीन अमेरिका से जो भी आयात करता था उसकी कीमतें 10 फीसदी तक बढ़ जाएंगी.
ट्रंप ने भारत पर भी ऐसा ही कर लगाने की घोषणा की है, हालांकि उन्होंने इस पर अभी अमल नहीं किया है.
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