
टैरर फंडिंग पर सजा काट रहे इंजीनियर राशिद को चुनाव में छूट, फिर सरजन बरकती का नामांकन क्यों हुआ खारिज?
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लोकसभा चुनाव के दौरान कश्मीर के अलगाववादी लीडर इंजीनियर राशिद को जेल में बंद होने के बावजूद सफलता मिली थी. इसी तर्ज पर कश्मीरी चरमपंथी नेता सरजन बरकती ने भी जेल में रहते हुए विधानसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया. हालांकि सिम्पथी वोट दूर, चुनाव आयोग ने उनका नॉमिनेशन ही खारिज कर दिया.
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए नामांकन पत्रों की जांच पूरी हो चुकी. वैध न पाने जाने पर इसमें कई नामांकन खारिज भी हुए. इसी में एक नाम है मौलाना सरजन बरकती का. आजादी चाचा के नाम से मशहूर बरकती के नॉमिनेशन रद्द होने को लेकर घाटी के कई नेताओं ने काफी हल्ला मचाया. दलील थी कि टैरर फंडिंग के ही आरोप में जेल में बंद इंजीनियर राशिद को जब इलेक्शन लड़ने का मौका मिला, तो बरकती को किसलिए रोका गया?
धारा 370 हटने के बाद से जम्मू कश्मीर में पहली बार असेंबली इलेक्शन होने जा रहे हैं. फिलहाल वहां तीन चरणों में सितंबर से लेकर अक्टूबर की शुरुआत तक वोटिंग होगी. लंबे समय बाद चुनाव की वजह से वहां के राजनैतिक माहौल की धमक दिल्ली तक सुनाई दे रही है.
इस नेता का नामांकन हुआ रिजेक्ट
इसी बीच कई अलगाववादी नेता भी मैदान भी हैं. इन्हीं में से एक नाम है मौलवी सरजन बरकती का. घाटी के भीतर देश विरोधी माहौल बनाने और टैरर फंडिंग के आरोप में बरकती जेल में हैं. वहीं उनके परिवार ने उनका नामांकन दाखिल किया जो तुरंत रद्द भी कर दिया गया.
मामले की तुलना कश्मीर के ही सेपरेटिस्ट लीडर इंजीनियर राशिद उर्फ अब्दुल राशिद से होने लगी. उत्तर कश्मीर से दो बार एमएलए रह चुके राशिद पिछले पांच सालों से वे यूएपीए (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के चार्ज में तिहाड़ जेल में सजा काट रहे हैं. राशिद के जेल में रहते हुए ही उनके परिवार ने उनका नामांकन भरा और चुनाव प्रचार भी किया, जिसमें उन्हें सफलता भी मिली.

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