
टिक... टिक... टिक 12:12! Dhurandhar 2 का टीजर है या बम... मेकर्स ने क्यों चुना एकदम सटीक वक्त?
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‘धुरंधर 2’ के टीजर की 12:12 टाइमिंग सिर्फ संयोग नहीं, एक सोची-समझी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी है. न्यूमरोलॉजी, सोशल मीडिया एंगेजमेंट और अटेंशन-इंजीनियरिंग— सब मिलकर इस वक्त को खास बना रहे हैं. टीजर आने से पहले ही 12:12 खुद एक इवेंट बन चुका है.
‘धुरंधर: द रिवेंज’ का टीजर अब बस कुछ ही घंटों में आने वाला है. ‘धुरंधर’ की धमाकेदार सक्सेस के साथ ही मेकर्स ने पार्ट 2 भी अनाउंस कर दिया था और फैन्स बड़ी बेसब्री से दूसरी फिल्म की एक झलक के लिए नए टीजर-ट्रेलर का इंतजार कर रहे थे. सोमवार को डायरेक्टर आदित्य धर ने अनाउंस किया कि ‘धुरंधर 2’ का टीजर मंगलवार को 12 बजकर 12 मिनट यानी 12:12 पर आएगा.
जनता में ‘धुरंधर 2’ को लेकर एक्साइटमेंट तो पहले से ही काफी थी, मगर इस 12:12 की टाइमिंग ने एक अलग जिज्ञासा जगा दी है. आखिर मेकर्स ने टीजर के लिए इतना पर्टिकुलर टाइम क्यों चुना? ये न्यूमरोलॉजी की वजह से है या पंचांग में कोई शुभ मुहूर्त है? या फिर इस सीक्रेट के पीछे कोई और वजह है?
क्या है 12:12 की न्यूमरोलॉजी? न्यूमरोलॉजी के हिसाब से 12 बहुत महत्वपूर्ण नंबर है. ये अंक अपने आप में पूर्णता का सिंबल है— साल में 12 महीने होते हैं, राशियां भी 12 होती हैं, 12 घंटे में घड़ी का एक चक्कर पूरा होता है. 12 को दो बार रिपीट करना बैलेंस, मोमेंटम और प्रोग्रेस का सिंबल बन जाता है.
लेकिन क्या न्यूमरोलॉजी ही 12:12 के पीछे का एकमात्र लॉजिक है? शायद नहीं. ‘धुरंधर 2’ के टीजर के लिए मेकर्स ने जो पर्टिकुलर टाइम चुना है, वो बॉलीवुड में मार्केटिंग के बदलते गेम का भी सिंबल है. इंडियन सिनेमा में स्टार के बर्थडे पर टीजर-ट्रेलर या पोस्टर शेयर करने का ट्रेंड पहले से रहा है. मगर एक पर्टिकुलर टाइमिंग इस ट्रेंड का नया लेवल है.
जीनियस मार्केटिंग ब्रेन का कमाल है 12:12 किसी भी फिल्म के लिए मार्केटिंग बेहद अहम होती है. ‘धुरंधर’ की ताबड़तोड़ कामयाबी के बाद सीक्वल के लिए माहौल पहले से ही तैयार था. डिजिटल दौर में एंगेजमेंट का खेल बॉक्स ऑफिस ट्रेंड तय करता है और 12:12 इस लिहाज से एक कमाल की टाइमिंग है.
12:12 में सिमेट्री है. अंकों का दोहराव इसे याद रखने में आसान बनाता है. सोशल मीडिया के दौर में 12:12 से एक यूनिक टाइम-स्टैम्प बन जाती है, जो नजर में आते ही दिमाग में दर्ज हो जाती है. ये आइडिया सोशल मीडिया के काउन्टडाउन कल्चर का हिस्सा है.













