
झारखंड: हेमंत सरकार की तीसरी वर्षगांठ पर भाजपा करेगी पोल खोल कार्यक्रम का आयोजन
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झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार आगामी 29 दिसंबर को अपने तीन साल पूरे कर रही है. इससे पहले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने घोषणा की है कि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार की तीसरी वर्षगांठ पर भाजपा पोल खोल कार्यक्रम का आयोजन करेगी. इस आयोजन के जरिए भाजपा राज्य सरकार की नाकामियों का भंडाफोड़ करेगी.
झारखंड में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने घोषणा की है कि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार जब अपनी तीसरी वर्षगांठ 29 दिसंबर को मनाएगी, तब भाजपा पोल खोल कार्यक्रम का आयोजन करेगी. इस आयोजन के जरिए भाजपा राज्य सरकार की नाकामियों का भंडाफोड़ करेगी. उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक महासंग्राम होगा. जो जनसवालों को लेकर, महिलाओं के साथ अनाचार को लेकर, नौजवानों को लेकर, आदिवासियों दलितों के साथ अत्याचार के सवालों को लेकर साथ ही जो सर्व समाज पीड़ित हैं, उनको लेते हुए 'हेमंत हटाओ, झारखंड बचाओ' का नारा देते हुए 'सिंहासन खाली करो कि जनता आती है' का आह्वान करते हुए पार्टी कार्यक्रम का आगाज करेगी.
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद ने नियोजन नीति को लेकर हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे झारखंड की जनता का जीत करार दिया है. प्रकाश ने कहा कि इस फैसले से मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का चेहरा उजागर हो गया है. सरकार का असली चेहरा अब जनता के सामने है.
सोरेन सरकार ने हिंदी भाषा के क्षेत्रों को घेरा
प्रकाश ने कहा कि यह सरकार साल 2020-21 में नियोजन नीति लाई. ग्रुप C और ग्रुप D की नौकरी में कुछ ऐसी चीजों का प्रावधान किया गया था, जो असंवैधानिक और गैर कानूनी था. इसलिए हाई कोर्ट ने झारखंड की जनता के हित में यह फैसले लेने का काम किया है. भारतीय जनता पार्टी इस फैसले का स्वागत करती है. प्रकाश ने कहा कि उक्त नियोजन नीति में दो चीजों पर जनता और पार्टी को आपत्ति थी. जो हिंदी इस देश का मस्तक है, 2011 को आधार माना जाए तो झारखंड में हिंदी बोलने वाले 62 प्रतिशत लोग हैं. मात्र 7.34 लोग उर्दू जानने वाले लोग हैं. हिंदी को शेड्यूल एरिया में रखा गया है. सरकार की नीयत में ही खोट थी. तुष्टिकरण के तहत हिंदी को परीक्षाओं से बाहर करने का काम किया. उर्दू को जबरन लादने का प्रयास किया गया. उर्दू पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है. नियोजन नीति के जरिए सरकार ने हिंदी के मस्तक को नीचे करने का काम किया. उर्दू को क्षेत्रीय भाषा के रूप में उपयोग किया गया और हिंदी को अपमानित करने का काम किया.
प्रकाश ने आगे कहा, जो बच्चे हिंदी में पढ़ते हैं उन्हें नौकरी से वंचित रखना सरकार की मंशा थी. संपर्क भाषा अंग्रेजी को भी परीक्षा से बाहर करने का काम किया गया. पार्टी चाहती है कि मुंडारी, संथाली भाषाओं का सबसे ज्यादा प्रचार प्रसार हो लेकिन यूनिवर्सिटीड में क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई नहीं हो रही है. क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई हो और रोजगार मिले, हम ऐसा चाहते हैं. दूसरी बात कि वैसे छात्रों को झारखंडी नहीं माना जाएगा, नियोजन में उन्हें लाभ नहीं मिलेगा, जिन्होंने झारखंड से बाहर 11वीं और 12वीं की पढ़ाई की है. भाजपा ने इसी को लेकर लगातार सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया था. यह झारखंड की जनता की जीत है.
हेमंत सरकार पर लगाए आरोप

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