
जॉम्बी वॉर्म... व्हेल मछली की हड्डी तक चबा जाते हैं, जिन्हें लेकर टेंशन में हैं वैज्ञानिक
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व्हेल और मगरमच्छों की हड्डी तक को चबा जाने वाले जॉम्बी वॉर्म यानी जॉम्बी कीड़े खत्म हो रहे हैं. इससे दुनियाभर के वैज्ञानिक डरे हुए हैं. एक शोध में पता चला कि समुद्र के एक हिस्से में इन जॉम्बी कीड़ों की प्रजाति खत्म हो चुकी है. ऐसे में जानते हैं आखिर ये जॉम्बी वॉर्म होता क्या है और इसके विलुप्त होने से वैज्ञानिक क्यों डरे हुए हैं.
समुद्री जीवों पर रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों ने व्हेल की हड्डियों को गहरे समुद्र में डाला , तो उन्हें उम्मीद थी कि जॉम्बी वर्म्स जल्दी से वहां पहुंच जाएंगे. 10 साल बाद भी एक भी ज़ॉम्बी वर्म उन हड्डियों के आसपास नहीं दिखा. वैज्ञानिकों ने इसे एक चिंताजनक नतीजा बताया, जो इस क्षेत्र के कम ऑक्सीजन वाले पानी से जुड़ा है. अब वैज्ञानिक समुद्र के इस हिस्से में जॉम्बी वॉर्म के विलुप्त होने की आशंका से डरे हुए हैं. ऐसे में समझते हैं कि ये जॉम्बी वॉर्म आखिर हैं क्या और ये कैसे समुद्री पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण हैं.
साइंस डेली के मुताबिक, ये जॉम्बी वॉर्म्स व्हेल के अवशेषों को विघटित करने और गहरे समुद्र के जीवन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इनकी गैर-मौजूदगी इस बात का संकेत देती है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऑक्सीजन की कमी से व्हेल के अवशेषों से बना पूरा इकोसिस्टम नष्ट हो सकता है.
एक दशक लंबा गहरा समुद्री प्रयोग ओशन नेटवर्क्स कनाडा (ONC) के वरिष्ठ स्टाफ वैज्ञानिक और विक्टोरिया विश्वविद्यालय के जीवविज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर फैबियो डी लियो ने ब्रिटिश कोलंबिया (BC) के तट पर 10 साल तक प्रयोग करते रहे. इस स्टडी में हंपबैक व्हेल की हड्डियों को गहरे समुद्र तल पर रखा गया. इसके बाद यह निगरानी की जाती रही कि कब उन हड्डियों को खाने जॉम्बी वॉर्म वहां पहुंचते हैं. 10 वर्षों तक इंतजार के बाद भी शोधकर्ताओं को ज़ोंबी कीड़ों का कोई निशान नहीं मिला. जबकि, व्हेल की हड्डियों को तोड़ने और गहरे समुद्र के फूड वेब को सपोर्ट करने में उनकी अहम भूमिका होती है.
जॉम्बी वॉर्म होता क्या है जॉम्बी वॉर्म या जॉम्बी कृमि एक समुद्री जीव है जो व्हेल जैसे बड़े जीवों की हड्डी तक को खा कर खत्म कर देते हैं. इन "हड्डी भक्षकों" को जॉम्बी वॉर्म या ओसेडेक्स के नाम से जाना जाता है. इसकी कई प्रजातियां हैं. इनमें से कुछ पर विलुप्त होने का संकट मंडरा रहा है. यह समुद्री जलवायु परिवर्तन से जुड़ा है, जिसके परिणामस्वरूप समुद्र के पानी में ऑक्सीजन कम हो रहा है.
ओसेडेक्स कृमि या जॉम्बी कीड़े अजीब तरह के जीव हैं. इनमें मुंह, गुदा और पाचन तंत्र नहीं होता, फिर भी ये हड्डियों में जड़ जैसी संरचनाएं बनाकर जीवित रहते हैं. इन जड़ों के अंदर सूक्ष्मजीव रहते हैं जो हड्डियों से पोषक तत्व निकालते हैं और ये पोषक तत्व कृमियों को पोषण प्रदान करते हैं.इस अनूठी भूमिका के कारण, ओसेडेक्स को एक ईको सिस्टम इंजीनियर माना जाता है, जो पोषक तत्वों को रिसाइकल करने में मदद करता है और ऐसी परिस्थितियां बनाता है जो अन्य प्रजातियों को वहां बसने की अनुमति देती है.
जॉम्बी कीड़ों की गैर-मौजूदगी इतनी चिंताजनक क्यों है? ओशन नेटवर्क्स कनाडा (ONC) ने दस वर्षों से अधिक समय तक पानी के भीतर हाई -रिज़ॉल्यूशन वाले कैमरों के फुटेज में किसी भी प्रकार के जॉम्बी कृमियों की मौजूदगी व्हेल की हड्डियों पर नहीं देखी. रिसर्चर प्रोफेसर फैबियो डी लियो ने बताया कि वैज्ञानिक दृष्टि से, इस प्रकार के परिणाम नकारात्मक होते हैं. उन्होंने बताया कि कीड़ों की गैर-मौजूदगी रिसर्च वाले समुद्र के हिस्से में ऑक्सीजन के असामान्य रूप से कम स्तर का संकेत देती है.

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