खरमास में शुरू हुआ 2026, नए साल में शुभ-मांगलिक कार्य करने वालों को ज्योतिषविद ने किया आगाह
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New Year 2026: साल 2026 सूर्य का वर्ष है. इस वर्ष के राजा देव गुरु बृहस्पति हैं. इसके अलावा, साल की पहली ही तिथि पर गुरु प्रदोष व्रत का संयोग भी बन रहा है. इसलिए सामान्य दिनों की तरह ही घर में पूजा-पाठ या दान-धर्म के कार्य किए जा सकते हैं.
New Year 2026: नया साल 2026 शुरू हो चुका है. लेकिन यह केवल अंग्रेजी कैलेंडर का ही नया साल है. हिंदू नववर्ष की गणना अलग तरह से होती है. हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है. इस कैलेंडर में भी 12 महीने होते हैं, लेकिन इसकी गणना विक्रम संवत के आधार पर की जाती है. इसलिए हिंदू नववर्ष गुरुवार, 26 मार्च से शुरू होगा. इस दिन से ही 'विक्रम संवत 2083' की शुरुआत होगी.
अंग्रेजी कैलेंडर का नया साल 2026 खरमास में प्रारंभ हो रहा है. सूर्य जब धनु राशि में होते हैं तो धनु खरमास लगता है, जिसमें शुभ व मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. चूंकि सूर्य 13 जनवरी तक धनु राशि में रहेंगे, इसलिए नए साल के लगभग पहले दो सप्ताह खरमास रहेगा. ऐसे में क्या नए साल में आपको घर में पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान या कोई शुभ-मांगलिक कार्य करने चाहिए. इस बारे में ज्योतिषविद डॉ. अरुणेश कुमार शर्मा ने विस्तार से जानकारी दी है.
ज्योतिषविद ने बताया कि अंग्रेजी कैलेंडर की शुरुआत खरमास में हो रही है. लेकिन इसका आरंभ कई मायनों में खास है. साल 2026 सूर्य का वर्ष है. इस वर्ष के राजा देव गुरु बृहस्पति हैं. इसके अलावा, साल की पहली ही तिथि पर गुरु प्रदोष व्रत का संयोग भी बन रहा है. इसलिए सामान्य दिनों की तरह ही घर में पूजा-पाठ या दान-धर्म के कार्य किए जा सकते हैं. इसमें कोई आपत्ति नहीं है. दूसरा, खरमास में केवल गृह प्रवेश और विवाह जैसे शुभ-मांगलिक कार्यों पर पाबंदी होती है. इसमें सांसारिक उत्सव वर्जित होते हैं. लेकिन आध्यात्मिक साधना, जप, तप और दान-पुण्य के लिए यह समय बहुत ही उत्तम माना जाता है.
नए साल में क्या करें? नए साल 2026 के मौके पर पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान से कोई परहेज नहीं है. आप सामान्य दिनों की तरह ही पूजा-पाठ कर सकते हैं. इस दौरान सूर्य देव की पूजा अत्यंत लाभकारी रहेगी. सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करके दिन की शुरुआत करें. दिन में आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें. फिर शाम को प्रदोष व्रत में भगवान शिव की विधिवत पूजा कर सकते हैं. उनके मंत्रों का जाप करें. भगवान को धूप, दीप, अक्षत, फल, मिठाई, आदि का भोग लगाएं. इसके बाद गरीबों को दान दें. इस दौरान आप अन्न, वस्त्र, कम्बल, घी, गुड़, तिल या अन्य कोई खाद्य सामग्री दान कर सकते हैं.
क्या न करें? इस दौरान विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश, नामकरण जैसे मांगलिक कार्यों से बचें. इसके अलावा, इस अवधि में नया व्यापार या नई दुकान, फैक्ट्री शुरू करने से भी बचना चाहिए. घर, मकान या वाहन खरीदने की भी मनाही है. तामसिक भोजन के सेवन से परहेज करें. क्रोध, अहंकार और द्वेष जैसी भावनाओं को मन में न पनपने दें.
