
जिनेवा में बातचीत से जंग तक, हैरान कर देगी ट्रंप-नेतन्याहू की रणनीति और ईरान पर हमले की पूरी कहानी
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जिनेवा में बातचीत के बावजूद अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हमला क्यों किया? कैसे और क्यों नेतन्याहू की साजिश में मोहरा बन गया अमेरिका? और यूएस में होने वाले मिडटर्म चुनाव से जुड़ी इस पूरी साजिश की कहानी.
US Israel Iran War 2026: इस वक्त पूरी दुनिया सिर्फ एक सवाल का जवाब जानना चाहती है कि आखिर अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला क्यों किया? वो भी तब जब हमले से कुछ घंटों पहले अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा में बातचीत चल रही थी. इस बातचीत में खुद ईरान के विदेश मंत्री भी शामिल थे. इस बातचीत के दौरान ईरान अमेरिका की कई शर्तों को मानने के लिए भी तैयार था. लेकिन जानकार कहते हैं कि असल में ट्रंप ने इजरायली प्रमुख बेंजामिन नेतन्याहू के बहकावे में आकर ये खौफनाक कदम उठाया और जंग की आग भड़का दी. इस साजिश की कहानी हैरान करने वाली है.
26 जनवरी 2026, जिनेवाईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमले से सिर्फ 48 घंटे पहले जिनेवा में एक बेहद अहम मीटिंग चल रही थी. ये मीटिंग अंग्रेजी बोलने वाले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिका के मिडिल ईस्ट के दूत विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेर्ड कुशनर के बीच थी. इन दोनों को खुद ट्रंप ने जिनेवा भेजा था. इस मीटिंग का मकसद था ईरान को इस बात पर राज़ी करना कि वो अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को जीरो कर देगा. इस बातचीत के दौरान ईरानी विदेश मंत्री ने दोनों अमेरिकी दूत के सामने सात पन्नों का एक प्रपोजल रखा.
इस प्रपोजल के जरिए ईरान अमेरिका को ये बताने की कोशिश कर रहा था कि कैसे आने वाले वक्त में अलग-अलग लेवल पर अपने परमाणु कार्यक्रम को कम करेगा. हालांकि दोनों दूत के जरिए ट्रंप ने ये साफ संदेश भिजवाया था कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को जीरो नहीं कर देता, बात नहीं बनेगी. 26 जनवरी की इस मीटिंग में पहला दौर इसी के साथ खत्म हो गया. दोनों दूत ने ट्रंप को जानकारी दी कि ईरान एक ही झटके में अपने परमाणु कार्यक्रम को जीरो करने पर राजी नहीं है. इसी के बाद विटकॉफ और कुशनर जिनेवा से वॉशिंगटन लौट आते हैं. अब दोनों ट्रंप को ये बताते हैं कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान इस मुद्दे पर किसी डील के लिए तैयार होगा.
यही वो घड़ी थी, जब ट्रंप फैसला ले चुके थे कि अब ईरान से आगे कोई बातचीत नहीं होगी. इस फैसले के पीछे सबसे अहम वजह थे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, जो बीते 11 फरवरी से ही ट्रंप को ईरान पर हमला करने की सलाह दे रहे थे. 11 फरवरी की सुबह नेतन्याहू वॉशिंगटन के ओवल ऑफिस में ट्रंप से मिलने पहुंचे थे. इस मुलाकात से कई हफ्ते पहले से ही इजरायल लगातार अमेरिका को ईरान पर हमले के लिए उकसा रहा था.
इजरायल ट्रंप को इस बात के लिए मनाने की कोशिश कर रहा था कि ईरान से बातचीत का कोई फायदा नहीं है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई न्यूक्लियर प्रोग्राम को जीरो करने पर कभी राजी नहीं होंगे. 11 फरवरी की इस मुलाकात के दौरान ट्रंप और नेतन्याहू के बीच करीब 3 घंटे तक मीटिंग चली. इस मीटिंग के दौरान ईरान के साथ जंग और हमले की तारीख तक को लेकर बातचीत हुई. इसी मीटिंग के अगले दिन ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर ये बयान दिया कि उन्हें डिप्लोमेटिक चैनल से ईरान के साथ बातचीत कर किसी नतीजे पर पहुंचने को लेकर शक है और वो ईरान के साथ बात कर करके थक चुके हैं.
इस पर एक रिपोर्टर ने ट्रंप से पूछा कि क्या वो ईरान में सत्ता पलटना चाहते हैं? ट्रंप का जवाब था कि इससे बेहतर और कुछ हो नहीं सकता. दरअसल, इजरायल लगातार ट्रंप से ईरान पर हमले की इजाजत मांग रहा था. पर जिनेवा में जब ट्रंप को अपनी मर्जी के हिसाब से जवाब नहीं मिला, तब उन्होंने तय किया कि वो सिर्फ इजरायल को ईरान पर हमले की ही इजाजत नहीं देंगे, बल्कि ईरान के टॉप लीडरशिप को खत्म करने के लिए इस हमले में इजरायल के पार्टनर भी बनेंगे. नेतान्याहू को और क्या चाहिए था?

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मिडिल ईस्ट वॉर से भी पहले से जंग चल रही है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार टीटीपी जैसे आतंकी समूहों को पनाह दे रही है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं. लेकिन तालिबान ने इन आरोपों को खारिज किया है. दोनों देशों का झगड़ना चीन के हितों के खिलाफ जा रहा है जिसे देखते हुए उसने एक प्रस्ताव रखा था. पाकिस्तान ने सामने से उसे खारिज कर दिया है.

भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना भारतीय दूतावास की अनुमति और संपर्क के किसी भी जमीनी सीमा को पार करने की कोशिश न करें. दूतावास ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने पर लोगों को गंभीर लॉजिस्टिक और इमीग्रेशन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. यह सलाह अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच जारी की गई है. दूतावास ने भारतीयों से आधिकारिक संपर्क में रहने और हेल्पलाइन नंबरों पर मदद लेने की अपील की है. दूतावास ने कहा, 'हमें बताए बिना ईरान न छोड़ें'. दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 17वां दिन है. हर दिन बीतने के साथ ये जंग और भीषण होती जा रही है क्योंकि अब अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए ईरान ने एडवांस मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. 28 फरवरी से चल रहे युद्ध में ईरान ने पहली बार अपनी सबसे आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक सेजिल से इजरायल को टारगेट किया है. सेजिल मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर है, इसी वजह से इसे डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है. ईरान की ओर से सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल होने से युद्ध में और तेजी आने का साफ संकेत मिल रहा है.

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