
जालसाजी, जुर्म और साजिश... यूके नागरिक मौलाना शम्सुल हुदा खान पर कैसे कसा ED का शिकंजा, पढ़ें पूरी कहानी
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यूके नागरिक मौलाना शम्सुल हुदा खान पर 2017 यूपी चुनाव में वोट डालने का इल्जाम है. सरकारी वेतन-पेंशन लेने और 33 करोड़ की संपत्ति अर्जित करने का संगीन आरोप भी है. इसी के चलते ED ने PMLA के तहत संत कबीर नगर और आजमगढ़ में उनके ठिकानों पर छापेमारी की है.
उत्तर प्रदेश की सियासत और जांच एजेंसियों के गलियारों में इन दिनों एक नाम गूंज रहा है. वो नाम है मौलाना शम्सुल हुदा खान का. एक तरफ वे ब्रिटेन के नागरिक बताए जाते हैं, दूसरी तरफ आरोप है कि उन्होंने 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में वोट डाला था. मामला यहीं नहीं रुकता. जांच में करोड़ों रुपये की संपत्ति, सरकारी वेतन और पेंशन लेने, और एनजीओ के जरिए फंड घुमाने जैसे गंभीर आरोप उन पर लगाए गए हैं.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटा है. सवाल सिर्फ एक शख्स का नहीं, बल्कि सिस्टम की जांच प्रक्रिया पर भी है. आखिर एक विदेशी नागरिक भारतीय वोटर लिस्ट में कैसे बना रहा?
भारतीय नागरिकता छोड़ने के बाद भी मतदान जांच एजेंसियों के मुताबिक, मौलाना शम्सुल हुदा खान ने साल 2013 में भारतीय नागरिकता त्यागकर ब्रिटेन की नागरिकता हासिल कर ली थी. लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद वे 2017 में यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान भारत आए और वोट डाला. यह आरोप चुनावी पहचान और मतदाता सूची की सटीकता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. बताया जा रहा है कि वे विशेष रूप से यूनाइटेड किंगडम से भारत पहुंचे थे. अगर यह आरोप सही साबित होता है तो यह चुनावी प्रक्रिया की निगरानी पर गंभीर चिंता की बात होगी. एजेंसियां अब इस पहलू की भी जांच कर रही हैं.
सरकारी वेतन और पेंशन लेने का आरोप जांच में यह भी सामने आया है कि नागरिकता बदलने के बाद भी खान कथित तौर पर 2017 तक सरकारी वेतन लेते रहे. इतना ही नहीं, पेंशन का लाभ भी 2023 तक मिलने का आरोप है. वे 1984 से 2013 तक एक मदरसे में बतौर शिक्षक और इस्लामिक उपदेशक जुड़े रहे थे. सवाल यह है कि विदेशी नागरिक बनने के बाद सरकारी सुविधाएं कैसे जारी रहीं? जांच एजेंसियां इसे फर्जीवाड़ा और गलत जानकारी देने का मामला मान रही हैं. इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी तंत्र की सतर्कता पर भी बहस छेड़ दी है.
PMLA के तहत ED की छापेमारी 11 फरवरी 2026 को प्रवर्तन निदेशालय, लखनऊ ने संत कबीर नगर और आजमगढ़ में खान से जुड़े दो ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की गई. इससे पहले यूपी पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़े तीन एफआईआर दर्ज किए थे. उन्हीं मामलों के आधार पर ED ने अपनी जांच शुरू की. छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड बरामद किए गए. अब एजेंसी इन कागजातों की बारीकी से जांच कर रही है.
NGO के जरिए फंड घुमाने का आरोप ED का आरोप है कि खान ने अपनी विदेशी नागरिकता छिपाकर और गलत जानकारी देकर सरकारी लाभ लिया. साथ ही, उनके नियंत्रण वाले एनजीओ के जरिए कथित तौर पर अवैध धनराशि को दान के रूप में दिखाकर घुमाया गया. इन पैसों का इस्तेमाल मदरसों के निर्माण और अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया. जांच में ‘रजा फाउंडेशन’ और ‘कुल्लियातुल बनातिर रजविया’ (Kuliyatul Banatir Razabia Educational and Welfare Society) नामक संस्थाओं का जिक्र सामने आया है. एजेंसियां इन संस्थाओं के बैंक खातों की भी जांच कर रही हैं.

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