
जाट बाहुल्य इलाकों में खतरे में बीजेपी! शुरू हुआ 'मिशन डैमेज कंट्रोल'
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अब तक बीजेपी के नेता लगातार यही कहते या दावा करते आ रहे थे कि सारे विरोध का केंद्र पंजाब ही है औऱ बाकी अन्य राज्यों में कोई विरोध नहीं है. लेकिन अब मामला गड़बड़ होता नजर आ रहा है.
दिल्ली की सीमाओं पर पिछले तीन महीनों से चल रहे किसान आंदोलनों और उसके राजनीतिक प्रभावों पर बीजेपी में सुगबुगाहट शुरू हो गई है. हालांकि बीजेपी के शीर्षस्थ नेता शुरू से ही इसे पंजाब केंद्रित बताते आ रहे हैं, लेकिन 26 जनवरी की घटना और हरियाणा व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जातिगत समीकरणों के बीच आंदोलन के बदलते स्वरूप को देखते हुए बीजेपी ने भी नए सिरे से किलेबंदी की कवायद शुरू कर दी है. और इस कवायद के केंद्र में हैं वो 40 लोकसभा सीटें, जिन्हें परंपरागत तौर पर जाट बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है. ये सीटें हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और कुछ हद तक राजस्थान में भी फैली हैं और जिनके बारे में कहा जाता है कि जाट मतदाता जिस करवट बैठता है, जीत उसी को होती है. बीजेपी की नई किलेबंदी
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अहम चेहरा अली लारीजानी को इजरायल ने टारगेट किया है. हालांकि ये अब तक साफ नहीं है कि अली लारीजानी की स्थिति कैसी है. इजराइल का एक और बड़ा दावा है कि उसके हमले की जद में बसीज कमांडर भी आए हैं. दावे के मुताबिक बसीज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर गुलामरेज़ा सुलेमानी को भी निशाना बनाया गया. बसीज, ईरान की एक अहम पैरामिलिट्री फोर्स है, जो आंतरिक सुरक्षा और विरोध प्रदर्शनों को दबाने में भूमिका निभाती है.

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होर्मुज में तेल और गैस पर ईरान ने जो रोक लगा रखी है, उसकी सुरक्षा के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने मित्र देशों से युद्धपोत भेजने की गुहार लगाई है. लेकिन फ्रांस, जापान, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया ने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया, यगां तक की यूके ने भी कहां वो अभी इसपर विचार विमर्श कर रहे है.

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