
जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस-एनसी सरकार बनाने के नजदीक, लेकिन 'असली चाबी' LG के पास | Opinion
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Jammu and Kashmir exit poll: जम्मू-कश्मीर में नई सरकार बनने जा रही है. सरकार किसी भी राजनीतिक दल की बने, चाहे बीजेपी की या फिर INDIA ब्लॉक की, मुख्यमंत्री की कुर्सी तो कांटों का ताज ही होने वाली है.
जम्मू-कश्मीर में खंडित जनादेश के कयास लगाये जा रहे थे, लेकिन एग्जिट पोल के जरिये दावा किया जा रहा है कि सत्ता बीजेपी के हाथ से फिसल रही है, क्योंकि नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन एग्जिट पोल में बहुमत के करीब नजर आ रहा है. C-Voter के एग्जिट पोल में नेशनल कांफ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन को 40 से 48 सीट मिलती दिख रही है. जबकि बीजेपी को 27 से 32 सीटें. पीडीपी को 6 से 12 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि निर्दलीयों को भी 6 से 11 सीटें मिलती दिख रही हैं.
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले ही भविष्य के शासन की झलक साफ साफ दिखाई देने लगी है. नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी नेताओं की तरफ से जैसी संभावना जताई जा रही थी, संकेत भी वैसे ही मिल रहे हैं - अब तो ये भी पक्का लग रहा है कि जम्मू-कश्मीर में जनता की चुनी हुई सरकार बन जाने के बावजूद शासन व्यवस्था में कोई खास बदलाव नहीं नजर आने वाला है.
उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती या उनके साथी चुनावों के पहले से ही जम्मू-कश्मीर में शासन व्यवस्था के दिल्ली मॉडल की आशंका जताने लगे थे.- लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तो जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल को राजा तक बता चुके हैं.
जम्मू-कश्मीर में चुनाव नतीजे आने से पहले ही पांच विधायकों के मनोनयन की खबर को लेकर बवाल शुरू हो चुका हैे. खास बात ये है कि नई सरकार के गठन में भी मनोनीत विधायकों की महत्वपूर्ण भूमिका होने वाली है. कांग्रेस का कहना है कि केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी का ऐसा कोई भी कदम लोकतंत्र और संविधान के मूल सिद्धांतो पर हमला होगा.
नई सरकार बनने से पहले विधायकों का मनोनयन क्यों
रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय की सिफारिश पर उप राज्यपाल मनोज सिन्हा पांच सदस्यों को नामित करेंगे. ये प्रक्रिया जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 में संशोधन के बाद पहली बार फॉलो की जाएगी.

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