
जमीन पर बूट्स उतारने से डरता नहीं वॉशिंगटन, वेनेजुएला पर ट्रंप के बयान का क्या है मतलब, क्या और भी देश निशाने पर?
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अमेरिकी सैनिकों ने वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अरेस्ट कर लिया. अब वे न्यूयॉर्क के डिटेंशन सेंटर में रखे गए हैं, जहां उनपर हथियारों और ड्रग्स की तस्करी के लिए मुकदमा चलेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बीच कहा कि वॉशिंगटन अस्थिर जगहों पर अपने बूट्स उतारने से नहीं डरता.
वेनेजुएला पर फिलहाल अमेरिकी कंट्रोल हो चुका. ये बदलाव हाल ही में हुआ, जब डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर हमला करते हुए अमेरिका की सेना ने वेनेजुएला के प्रेसिडेंट को अगवा कर कैद में ले लिया. अब अस्थाई तौर पर इस देश का प्रशासन यूएस चलाएगा. ट्रंप ने खुद कहा कि वॉशिंगटन तब तक वेनेजुएला को चलाएगा, जब तक वहां सत्ता का सही बदलाव नहीं हो जाता. यानी सैनिकों के जरिए वाइट हाउस ही वहां मौजूद रहने वाला है.
अमेरिका के लिए ये नई बात नहीं. पहले भी वो कई देशों की सत्ता में दखलंदाजी कर चुका. उसने लैटिन अमेरिकी और कैरेबियन देशों में अनेकों बार अपनी सेना उतारी और सत्ता बदलने में भूमिका निभाई. यह सब ज्यादातर अपने रणनीतिक हितों और सुरक्षा बनाए रखने के नाम पर हुआ.
किन-किन देशों में हस्तक्षेप
शुरुआती मामलों में क्यूबा का नाम आता है. साल 1898 में स्पेन-अमेरिका जंग के बाद अमेरिका ने क्यूबा में अपनी सेना उतारी. स्पेन को हराने के बाद क्यूबा को आजादी तो मिली लेकिन असल में अमेरिका का दबदबा बना रहा. वो मदद के नाम पर वहीं बना रहा और भीतर मामलों में दखल देता रहा. बाद में साठ के दशक में अमेरिका समर्थित बे-ऑफ-पिग्स हमला हुआ जिसमें क्यूबाई कास्त्रो सरकार को गिराने की नाकाम कोशिश की गई.
हैती में अमेरिका ने साल 1915 से 1934 तक सेना तैनात रखी. कहा गया कि वहां राजनीतिक अराजकता है और अमेरिकी हित खतरे में हैं. लेकिन इस दौरान अमेरिका ने हैती की आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था पर गहरा कंट्रोल रखा. कई फैसले वाशिंगटन के इशारे पर हुए. हैती की जनता अब भी इसे लेकर यूएस से नाराज रहती है.
डोमिनिकन रिपब्लिक में साल 1965 में अमेरिका ने बीस हजार से ज्यादा सैनिक उतारे. वहां चुने हुए राष्ट्रपति बोश को हटाए जाने के बाद गृहयुद्ध जैसे हालात बन गए थे. अमेरिका ने कहा कि वह कम्युनिज्म को रोकना चाहता है. लेकिन असल में वो अपनी पसंद की सत्ता वहां चाहता था और यही हुआ भी.

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप की नजरें ग्रीनलैंड पर हैं. उनका तर्क है कि सुरक्षा वजहों से अमेरिका के पास ग्रीनलैंड होना ही चाहिए. ट्रंपियन जिद से चर्चा में आया देश कुछ साल पहले भी चर्चा में था, जब वहां की टीनएज लड़कियों पर चुपके से हुए प्रयोग की पोल खुली थी.

वेनेजुएला के मौजूदा संकट को देखते संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सोमवार को इमरजेंसी मीटिंग बुलाई गई. जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप के एक्शन को लेकर चिंता ज़ाहिर की गई. वहीं डेमोक्रेट्स नेता समेत कोलंबिया, रूस, चीन और तुर्किए ने कड़े शब्दों में निंदा की है और कार्रवाई को गैर कानूनी बताया. देखें दुनिया आजतक.

अमेरिका के मैरीलैंड में रहने वाली भारतीय मूल की निकिता राव गोदिशाला की हत्या का मामला सामने आया है. निकिता एक प्रतिभाशाली डेटा एनालिस्ट थीं जिन्हें हाल ही में कंपनी से सम्मान मिला. उनकी हत्या उनके पूर्व बॉयफ्रेंड अर्जुन शर्मा ने की, जिसने वारदात के बाद भारत भागना चुना. पुलिस ने अर्जुन शर्मा के खिलाफ फर्स्ट और सेकेंड डिग्री मर्डर के आरोप में वारंट जारी किया है.

वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उठाने के बाद अमेरिका ने खुल्लम खुल्ला ऐलान कर दिया है कि वो अपने इलाके में किसी नहीं चलने देगा. संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत ने स्पष्ट कहा है कि आप वेनेजुएला को ईरान, हिज़्बुल्लाह, गैंग्स, क्यूबा के इंटेलिजेंस एजेंट्स और उस देश को कंट्रोल करने वाले दूसरे बुरे लोगों के लिए ऑपरेटिंग हब नहीं बना सकते. US का ये बयान चीन और रूस को साफ संदेश है.

अमेरिकी सेना ने सैन्य ऑपरेशन चलाकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया. डोनाल्ड ट्रंप का आरोप है कि मादुरो सरकार की शह पर उनके देश तक नशे की सप्लाई हो रही थी. वेनेजुएला पर अटैक के बाद आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका कई और देशों पर हमलावर हो सकता है. क्यूबा का नाम इसमें टॉप पर है.

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