
जब प्रकाश सिंह बादल को झेलनी पड़ी थी मनप्रीत की बगावत... राजनीति में नई नहीं है चाचा-भतीजे की जंग
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राजनीति में चाचा-भतीजे के बीच की टक्कर कोई नई नहीं है, बल्कि अजित पवार के एनसीपी से बगावत के प्रकरण ने ऐसे मामलों को प्रकाश में ला दिया है. महाराष्ट्र में ही ठाकरे परिवार के बीच चाचा-भतीजे के जंग किसी से छिपी नहीं है, तो वहीं उत्तर प्रदेश में मुलायम परिवार तो हरियाणा में चौटाला फैमिली की तकरार विदित है. ऐसी ही एक कहानी पंजाब की सत्ता में बादल परिवार की भी है.
हस्तिनापुर के सिंहासन पर धृतराष्ट्र बैठे थे. सत्ता के लोभ और पुत्र मोह में उन्होंने भतीजे युधिष्ठिर से आंख फेर रखी थी. लिहाजा पहले राज्य के दो हिस्से हुए और फिर महाभारत. भतीजे ने कृष्ण के साथ मिलकर सत्ता पलट दी. 5000 साल पुरानी ये कहानी बताती है कि भारतीय सियासत में ऐसे घटनाक्रम नए नहीं है. अलग-अलग समय पर राजनीति के दिग्गजों को रिश्तों में मिली ये चोट सहनी ही पड़ी है. आज के संदर्भ में देखें तो एनसीपी और शरद पवार के साथ ऐसा ही कुछ हुआ है. भतीजे से बेटी को आगे करने का महीने भर पहले ही उठाया गया कदम इस कदर भारी पड़ा कि कद्दावर नेता कहे जाने वाले शरद पवार टूट चुके हैं. उनके आगे नाम और निशान की बड़ी लड़ाई आकर खड़ी हो गई है.
रिश्तों में चाचा को मिलती रही भतीजों से टक्कर
महाराष्ट्र में ही ठाकरे परिवार की टूट, उत्तर प्रदेश में मुलायम परिवार में शिवपाल-अखिलेश की जंग और हरियाणा में चौटाला परिवार के चाचा-भतीजे की लड़ाई किसी से छिपी नहीं है. सत्ता की इन कहानियों में एक कहानी पंजाब के कद्दावर नेता रहे, शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक और बाबा बादल के नाम से पहचाने जाने वाले दिवंगत नेता प्रकाश सिंह बादल की भी है. कहानी कुछ ऐसी है कि जो चोट उन्हें सत्ता में कभी नहीं मिली, वो घाव उनके भतीजे मनप्रीत सिंह बादल ने उन्हें दिया था.
पंजाब की राजनीति में भी है महाराष्ट्र जैसा किस्सा
सत्ता की उठा-पटक के बीच प्रकाश सिंह बादल रिश्तों के झंझावात से नहीं बच पाए. रिश्तों में राजनीतिक टकराहट उन्हें अपने ही भतीजे मनप्रीत सिंह बादल से मिली, जब मनप्रीत उनसे नाराज होकर अलग हो गए थे और फिर अपनी अलग पार्टी ही बना ली थी. आज पंजाब के सीएम भगवंत मान कभी मनप्रीत सिंह बादल के बहुत करीबी दोस्त भी हुआ करते थे. बल्कि मनप्रीत ही वह शख्सियत हैं जो भगवंत मान को राजनीति में लेकर आए थे. उन्होंने भगवंत मान को अपनी पार्टी पीपीपी से टिकट दिया था और पहली बार उन्हें चुनाव भी मनप्रीत ने ही लड़वाया था.
क्यों अलग हुए थे चाचा-भतीजे के रास्ते

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