
जब कांग्रेस के सीएम ने की थी CAA की मांग, पढ़ें- 20 साल पुराना वो किस्सा
AajTak
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) देशभर में लागू हो गया है. कहीं इसका विरोध हो रहा है तो कहीं इसका समर्थन किया जा रहा है. आज से 20 साल पहले भी नागरिकता कानून में संशोधन हुआ था और माना जाता है कि उसने ही मोदी सरकार के CAA की नींव रखी थी.
बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 20 साल पहले रैली में एक बात कही थी. उन्होंने कहा था कि मतदान के समय कई लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब होने की शिकायतें सामने आती हैं. उनका कहना था कि किसी को भी वोट देने के अधिकार से वंचित करना लोकतंत्र को कमजोर करता है.
आडवाणी ने जिस वक्त ये बात कही थी, तब वो अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में गृह मंत्री होने के साथ-साथ डिप्टी पीएम भी थे. उन्होंने ये बात 2004 के लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राजस्थान के चित्तौड़गढ़ की एक रैली में कही थी.
उन्होंने ये बात ऐसे समय कही थी, जब जनवरी 2004 में ही राष्ट्रपति ने नागरिकता संशोधन कानून 2003 को मंजूरी दी थी. आडवाणी ने तब ये भी कहा था कि सभी नागरिकों के लिए एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स) होना चाहिए.
1955 में आया नागरिकता कानून पहली बार 1985 में असम अकॉर्ड के कारण संशोधित किया गया था. लेकिन 2003 का संशोधन इसलिए जरूरी है, क्योंकि इसी संशोधन ने मोदी सरकार के नागरिकता संशोधन कानून की नींव रखी थी.
अब जब 2019 का नागरिकता संशोधन कानून देशभर में लागू हो गया है, तो 2003 के संशोधन पर भी नजर डालना जरूरी हो जाता है.
जब आया NRC का कॉन्सेप्ट

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









