
जब एक सैनिक के बदले इजरायल ने छोड़े थे हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी कैदी, इस बार क्या मांग रहा है हमास?
AajTak
हमास और इजरायल की जंग 7 महीनों से जारी है. इस बीच हमास ने एक वीडियो रिलीज की, जिसमें बंधक रिहाई की गुहार लगा रहे हैं. फिलहाल उसने अलग-अलग देशों के 129 लोगों को बंधक बना रखा है. उन्हें छुड़वाने के लिए 18 देशों ने एक अपील की. खुद इजरायल भी बंधकों को छोड़ने के बदले फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करने का वादा कर चुका. जानिए, बंधकों को छुड़ाने की कोशिश कहां तक पहुंच सकी.
गाजा पर शासन कर रहे आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायली सीमा पर हमला कर हजारों जानें ले लीं, साथ ही 253 लोगों को बंधक बना लिया. इसके बाद से इजरायल गाजा पट्टी पर हमलावर है. वो बंधकों को वापस चाहता है लेकिन हमास कई ऐसी शर्तें रखा रहा है जो उसे मंजूर नहीं. इस रस्साकशी के बीच हमास की कैद में रहते लोगों को 2 सौ से ज्यादा दिन बीत चुके. अब बंधकों का नया वीडियो जारी हुआ है.
क्या है ताजा वीडियो में
इसमें दो इजरायली बंधक हैं, जिनकी पहचान 64 साल के कीथ सीगल और 47 साल के ओमरी मिरान के तौर पर हुई. वे अपने परिवारों को याद कर करते हुए काफी भावुक नजर आ रहे हैं. साथ ही रिहाई की फरियाद करते हुए इजरायली हमले को रोकने की मांग कर रहे हैं. एक बंधक कीथ सीगल ने हवाई हमले के दौरान बंधकों की जान को खतरा बताया.
ये वीडियो हमास ने तब जारी किया, जब बंधकों में से कई के मृत होने की आशंका जताई जा रही थी. इसके साथ ही रिहाई की मांग इंटरनेशनल स्तर पर दोबारा जोर पकड़ चुकी.
18 देशों ने की हमास से अपील
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, होस्टेजेस को वापस पाने के लिए अमेरिका समेत 17 देशों ने एक अपील की है. इनमें कनाडा, कोलंबिया, डेनमार्क, जर्मनी, हंगरी, पोलैंड, पुर्तगाल, स्पेन, ब्रिटेन और थाइलैंड समेत वे सारे देश हैं, जिनके लोग हमास के कब्जे में हैं. आतंकियों ने अक्टूबर में 253 लोगों को बंधक बनाया था, जिसमें से 129 अब भी उन्हीं के पास हैं.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.









