
जगदीप धनखड़ पर दांव पड़ा भारी? अब उपराष्ट्रपति पद के लिए 'सेफ गेम' खेलने की तैयारी में BJP
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उपराष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही सियासी पारा चढ़ गया है. चुनाव आयोग ने रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति कर दी है और इसके साथ ही एनडीए खासकर बीजेपी उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया में जुटने वाली है. संकेत हैं कि विपक्ष भी मुकाबले के लिए मैदान में उतरने की तैयारी कर चुका है.
उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है. चुनाव आयोग ने रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति कर दी है. इसके साथ ही एनडीए, खासतौर पर बीजेपी अब उम्मीदवार के चयन पर विचार-विमर्श शुरू करेगी. इस बीच संकेत हैं कि विपक्ष भी मुकाबले में कूदने की तैयारी में है.
लोकसभा और राज्यसभा के कुल 782 सांसदों वाले इलेक्टोरल कॉलेज में एनडीए के पास करीब 425 सांसदों का समर्थन है. ऐसे में संख्या के लिहाज से एनडीए उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है. यही वजह है कि उप राष्ट्रपति पद को लेकर सत्ता पक्ष पूरी रणनीतिक बढ़त के साथ आगे बढ़ रहा है.
दरअसल, जगदीप धनखड़ ने संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन 21 जुलाई को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद यह पद रिक्त हो गया है. उपसभापति हरिवंश फिलहाल राज्यसभा की अध्यक्षता कर रहे हैं.
बीजेपी की कोर टीम ने भले ही अब तक औपचारिक चर्चा शुरू नहीं की है, लेकिन पार्टी और उसके सहयोगियों के बीच यह स्पष्ट राय बनती दिख रही है कि इस बार 'धनखड़ जैसा प्रयोग' नहीं दोहराया जाएगा. संगठन से जुड़े, अनुभवी और राजनीतिक रूप से भरोसेमंद चेहरे को प्राथमिकता दी जा सकती है.
धनखड़ ने 1991 में जनता दल से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी. बाद में वे कांग्रेस से जुड़े और फिर बीजेपी में शामिल हुए. हालांकि सक्रिय राजनीति में उनकी भागीदारी सीमित रही. सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में काम करते हुए उन्होंने बीजेपी का ध्यान खींचा और 2019 में पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किए गए. इसके बाद 2022 में वे एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनाए गए.
राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल ममता बनर्जी सरकार से लगातार टकराव के चलते सुर्खियों में रहा. उपराष्ट्रपति बनने के बाद भी उनकी मुखर और असामान्य कार्यशैली चर्चा में रही, लेकिन यही शैली धीरे-धीरे केंद्र सरकार के साथ उनके रिश्तों में खटास का कारण बन गई.

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