
छतों से फेंक रहे थे कांच की बोतल और ईंटें, हम जान बचाने एक घर में छिपे; निकालने आई फोर्स को भीड़ ने गलियों में घेरा...Haldwani हिंसा में बची लेडी कॉन्स्टेबल की आपबीती
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Haldwani violence: उत्तराखंड पुलिस की एक महिला कॉन्स्टेबल ने जानलेवा हिंसा पर उतारू भीड़ से घिरने और बाल-बाल बचने की आपबीती सुनाई है. वह उपद्रव को काबू करने अपनी टीम के साथ पहुंची थी. हमले में घायल पुलिसकर्मी का फिलहाल अस्पताल में इलाज चल रहा है.
Haldwani Violence Riots: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा में हिंसा को देखते हुए कर्फ्यू लगा दिया गया है और दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं. इस हिंसक घटना के सोशल मीडिया पर वायरल हुए घटना के वीडियो और फोटोज बहुत ही विचलित करने वाले हैं. एक वीडियो में महिला पुलिसकर्मी ने जानलेवा हिंसा पर उतारू भीड़ से घिरने और बाल-बाल बचने की आपबीती सुनाई है. वह उपद्रव को काबू करने अपनी टीम के साथ पहुंची थी. हमले में घायल पुलिसकर्मी का फिलहाल अस्पताल में इलाज चल रहा है.
चोटिल महिला पुलिसकर्मी ने बताया, ''हम बाल-बाल बचकर निकल पाए हैं. महिला और पुरुषों की भीड़ छतों और जमीन से पथराव कर रही थी. गलियों में जाम लगा दिया ताकि हम बचकर बाहर नहीं निकल पाएं. बचने के लिए हम 15-20 पुलिसकर्मी एक घर के अंदर घुस गए थे. लेकिन बाहर खड़ी उपद्रवियों की भीड़ ने आग लगाने की कोशिश की. हमने बड़ी मुश्किल से आला अधिकारियों को अपनी लोकेशन भेजी. काफी देर बाद हमारी फोर्स हमें उस घर से निकालने के लिए आई. जब हम निकले तो छतों से फेंके जा रहे पत्थर फोर्स को लगे. कांच की बोतलें और ईंटों से पुलिसकर्मी घायल हो गए. जिस घरवाले ने हमारी जान बचाई, उसके भी मकान में घुसकर उपद्रवियों ने बवाल किया. उसके दरवाजे और सामान तोड़फोड़ दिया.''
थाने के भीतर पुलिस को जिंदा जलाने की कोशिश: DM वंदना सिंह
हल्द्वानी हिंसा पर नैनीताल जिले की डीएम वंदना सिंह ने कहा, पुलिस के ऊपर पथराव किया गया. पुलिस वालों को थाने में जिंदा जलाने की कोशिश की गई. यह एक सुनियोजित हमला था. पुलिस प्रशासन पर पत्थरों से हमला किया गया. पेट्रोल बम से से आग लगाकर थाने में आग लगा दी गई. थाने से पुलिस अधिकारियों को उपद्रवियों की भीड़ ने बाहर नहीं आने दिया. थाने के बाहर खड़े लोग पुलिस अधिकारियों को मारना चाह रहे थे, इसलिए उपद्रव कर रहे थे.
डीएम वंदना सिंह ने कहा, भीड़ इस ढांचे को बचाने की कोशिश नहीं कर रही थी. बस वह लोग प्रशासन को मारने की कोशिश कर रहे थे. वो सरकार को बताना चाहते थे कि हम कानून से ऊपर हैं. क्योंकि जिस जगह से अतिक्रमण हटाया गया, वहां कोई धार्मिक परिसर के नाम पर रजिस्टर्ड जगह नहीं थी. यह एक खाली प्रॉपर्टी थी. कुछ लोग उसे मदरसा कहते हैं, कुछ नमाज स्थल कहते हैं. लेकिन कुछ मान्यता प्राप्त और पंजीकृत नहीं है.
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