
'चुनिंदा नेताओं को टार्गेट करने के बजाय...', हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, दी ये हिदायत
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हेट स्पीच के खिलाफ एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने कहा कि संवैधानिक और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों का कर्तव्य संविधान की रक्षा करना है.
सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए सख्त गाइडलाइन बनाने के संकेत दिए हैं. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस नागरत्न और जस्टिस बागची की बेंच ने कहा कि सार्वजनिक हस्तियों और संवैधानिक अधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे संविधान की शपथ का पालन करें.
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी है कि वे केवल एक सियासी दल या विशिष्ट व्यक्तियों को टार्गेट करने के बजाय एक नई और व्यापक याचिका दाखिल करें. अदालत ने यह टिप्पणी उस याचिका पर की, जिसमें हिमंत, धामी, योगी और डोवाल जैसे नेताओं के बयानों का हवाला दिया गया था.
बेंच ने जोर देकर कहा कि सियासी दलों को अपने नेताओं पर लगाम लगानी चाहिए और मीडिया को भी ऐसे नफरती भाषणों को बार-बार दिखाने से बचना चाहिए.
सिलेक्टेड टार्गेटिंग पर कोर्ट की आपत्ति
सुनवाई के दौरान सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिका में केवल चुनिंदा लोगों को निशाना बनाया गया है. कोर्ट ने कहा कि हम किसी एक सियासी दल या शख्स को टार्गेट करने वाली याचिकाओं पर विचार नहीं कर सकते, लेकिन हेट स्पीच का बड़ा मुद्दा बहुत संवेदनशील और गंभीर है. याचिकाकर्ता के वकील कपिल ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि उनका इरादा किसी को टार्गेट करना नहीं है और वे उन नामों को हटा देंगे. कोर्ट ने सुझाव दिया कि एक नई याचिका दाखिल की जाए, जिसमें सिर्फ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए गाइडलाइन की मांग हो.
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