
घंटों काम करने से बढ़ा हार्ट अटैक का खतरा, WHO ने दी चेतावनी
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कोरोना महामारी की वजह से पिछले एक साल से ज्यादातर लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं. घर से ही काम करने की वजह से लोगों का स्क्रीन टाइम बढ़ गया है. WHO और ILO की रिपोर्ट के मुताबिक काम के बोझ का सबसे ज्यादा असर पुरुषों पर पड़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक 45 से 74 वर्ष की आयु के बीच हर सप्ताह 55 घंटे या उससे अधिक समय तक काम करने वाले पुरुषों में मौत का आंकड़ा 72% तक था.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक लॉन्ग वर्किंग आवर्स यानी कि लंबे समय तक काम करने से दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ा है. इसकी वजह से दुनिया भर में लाखों लोगों की मौत हो रही है. एनवायरनमेंट इंटरनेशनल में छपी WHO और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) की स्टडी के मुताबिक, 2016 में लंबे समय तक काम करने से स्ट्रोक और दिल की बीमारी से 7,45,000 लोगों की मौत हुई थी. इस आंकड़े में 29 फीसदी की वृद्धि हो चुकी है. WHO ने ये रिपोर्ट पिछले महीने जारी की थी. कोरोना महामारी की वजह से पिछले एक साल से ज्यादातर लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं. घर से ही काम करने की वजह से लोगों का स्क्रीन टाइम बढ़ गया है. WHO और ILO की रिपोर्ट के मुताबिक काम के बोझ का सबसे ज्यादा असर पुरुषों पर पड़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक 45 से 74 वर्ष की आयु के बीच हर सप्ताह 55 घंटे या उससे अधिक समय तक काम करने वाले पुरुषों में मौत का आंकड़ा 72% तक था. डॉक्टर्स भी काम की वजह से होने वाले मानसिक तनाव और दिल की बीमारी के बीच संबंध बताते हैं. मेडिकवर हॉस्पिटल्स हैदराबाद के कार्डियक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट डॉक्टर कुमार नारायण ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, 'आजकल, न केवल काम के घंटे लंबे हो गए हैं, बल्कि काम का तनाव भी बहुत ज्यादा बढ़ गया है.'More Related News

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