
गाजा में इजरायल की बड़ी एयर स्ट्राइक, स्कूल पर किए गए हमले में 100 फिलिस्तीनियों की मौत
AajTak
पूर्वी गाजा में विस्थापित लोगों के आवास वाले एक स्कूल को निशाना बनाकर किए गए इजरायली हमले में 100 से अधिक लोग मारे गए हैं. हमास के मुताबिक हमला तब हुआ जब जब लोग नमाज़ अदा कर रहे थे. इस हमले में दर्जनों लोग घायल हुए हैं.
इजरायल द्वारा गाजा में लगातार बमबारी और एयर स्ट्राइक की जा रही है. अब एक ताजा हवाई हमले में 100 से अधिक फिलिस्तीनी नागरिकों के मारे जाने की खबर सामने आ रही है. फ़िलिस्तीनी समाचार एजेंसी WAFA के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि पूर्वी गाजा में विस्थापित लोगों के आवास वाले एक स्कूल को निशाना बनाकर किए गए इजरायली हमले में 100 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं.
हमास द्वारा संचालित गाजा सरकार के मीडिया कार्यालय के अनुसार, हमला उस समय हुआ जब लोग नमाज़ अदा कर रहे थे. कार्यालय ने एक बयान में कहा, "इजराइली हमलों ने फ़ज्र (सुबह) की नमाज़ अदा करते समय विस्थापित लोगों को निशाना बनाया, जिसके कारण हताहतों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई."
लगातार हमले कर रहा है इजरायल
पिछले हफ्ते गाजा में चार स्कूलों पर हमला किया गया था. 4 अगस्त को, गाजा शहर में विस्थापित लोगों के लिए आश्रय के रूप में काम करने वाले दो स्कूलों पर इजरायली हमला हुआ, जिसमें 30 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए थे. इससे पहले, गाजा शहर में हमामा स्कूल पर इजरायली हमले में 17 लोग मारे गए थे. 1 अगस्त को दलाल अल-मुगराबी स्कूल पर इजरायली हमले में 15 लोग मारे गए थे. इजरायल का दावा है कि परिसर के अंदर "आतंकवादी" हैं जो "हमास कमांड कंट्रोल सेंटर" के रूप में काम कर रहे हैं.
ये भी पढ़ें: ईरान के प्लान पर इजरायल को मिला अमेरिका का खुला साथ! विदेश मंत्री ने दिया भरोसा

अमेरिका और ईरान में इस समय टकराव देखने को मिल रहा है. अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहा है. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. हालांकि, अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. लगातार धमकियों के बावजूद ईरान पर सीधे हमले से क्यों बच रहा अमेरिका? देखें श्वेतपत्र.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. वहीं अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल के आठ प्रमुख शहरों पर हमले की योजना तैयार की है. इस बढ़ती तनाव की स्थिति से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे और बढ़ सकते हैं.

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला करते हुए ट्रंप को ईरान में हुई मौतों, नुकसान और बदनामी के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें 'अपराधी' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान में हालिया अशांति अमेरिका की साजिश है और ट्रंप ने खुद इसमें दखल देकर प्रदर्शनकारियों को उकसाया.

व्हाइट हाउस ने गाजा को फिर से बसाने और उस पर शासन के लिए बने 'बोर्ड ऑफ पीस' के सदस्यों की लिस्ट जारी की है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर सदस्य होंगे. देखें दुनिया आजतक.

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए फांसी जैसे खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया तो अमेरिका ने सीधे एक्शन की चेतावनी दे डाली. हालांकि बाद में ईरान और ट्रंप के ताजा बयानों ने दुनिया को थोड़ी राहत दी. मगर ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का संकेत बनता जा रहा है.








