
गाजा: 'जिंदा रहने की कोशिश में भटकने को मजूबर...', 1 साल में 14 बार फिलिस्तीनी परिवार का विस्थापन
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पिछले साल अक्टूबर में इजरायल का हमला शुरू होने के बाद गाजा के करीब 23 लाख नागरिक कम से कम एक बार जरूर विस्थापित हुए हैं. काफी लोगों को कई बार विस्थापित होना पड़ा है. गाजा का ज्यादातर इलाकों में इजरायली सेना ने विस्थापन का आदेश दे रखा है, लोगों का कहना है कि उनके पास भागने के लिए जगह नहीं बची है.
पिछले एक साल से ज्यादा वक्त से फिलिस्तीन में इजरायल का हमला जारी है, जिसमें हजारों नागरिकों की मौत हो चुकी है. इजरायल के हमले से मरने वालों में महिलाएं और बच्चे ज्यादा हैं. Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्थ गाजा में करीब 400,000 फिलिस्तीनी फंसे हुए हैं और इजराइली सेना के निकासी आदेश जारी करने के बावजूद किसी को भी इलाके को छोड़ने की अनुमति नहीं दे रही है. ऐसे में कहानी एक ऐसी फिलिस्तीनी महिला और उसके परिवार की, जिसको जंग के पिछले एक साल में 14 बार विस्थापित होने को मजबूर होना पड़ा.
पीड़ित महिला सबरीन ने Al Jazeera से बात करते हुए कहा, "जंग से पहले मैं एक शानदार जिंदगी गुजार रही थी. एक ऐसी जिंदगी, जिसमें इज्जत थी. अल्लाह के शुक्र से हम खुशहाल थे. मेरे पति एक मछुआरे थे, हमें और कुछ नहीं चाहिए था. मेरी पोती खुश थी, वह अपने स्कूल जाती थी लेकिन जंग ने सब ठप कर दिया."
'जिंदा रहने की कोशिश में भटकने को मजूबर...'
इजरायल के पहले हमले में सबरीन को गाजा शहर में बना अपना घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा. उन्होंने पहले भी अपने परिवार के साथ नॉर्थ गाजा में शरण ली थी लेकिन आगे साउथ की तरफ जाने के बाद उन्हें जिंदा रहने की कोशिश में बार-बार साउथ और फिर सेंट्रल गाजा को पार करना पड़ा.
फिलिस्तीनी नागरिक सबरीन आगे कहती हैं, "मैं आपको विस्थापन के बारे में बताती हूं. आप पर अत्याचार किया जाता है, यह बहुत महंगा है, हम लोगों से लोन लेते हैं ताकि हम एक जगह से निकल कर दूसरी जगह जा सकें. विस्थापन की शुरुआत से लेकर अब तक चुकाने के लिए बहुत सारे लेन हैं और मेरे नाम पर भी कुछ नहीं बचा है. यह इस हद तक पहुंच गया है कि मुझे अपनी बेटी और अपनी नातिन का गोल्ड बेचना पड़ा है. अब जो बचा है, वह है मेरी नातिन का कंगन, उसकी अंगूठी और झुमके हैं."
जब सीजफायर होने की खबर आई, तो उन्होंने घर जाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर नॉर्थ की ओर लौटने की कोशिश की.

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