
क्रांति से निकले 'न्यू नेपाल' में इंडिया फैक्टर कहां है? चुनाव को कैसे देख रहे वहां के प्रवासी
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नेपाल में 5 मार्च के चुनाव से पहले पलायन बड़ा मुद्दा बन गया है. भारत में काम कर रहे लाखों नेपाली मतदाता वोट नहीं दे पा रहे. रोजगार की कमी से पुरुषों के साथ महिलाएं और युवा भी भारत आ रहे हैं. गांव खाली हो रहे हैं और चुनावी माहौल फीका पड़ता दिख रहा है.
नेपाल में 5 मार्च को होने वाले चुनाव की तैयारियां तेज हैं. Gen-Z क्रांति के बाद यह देश का पहला चुनाव है, जिसमें लोगों ने भ्रष्टाचार और असमानता जैसे मुद्दों पर केपी ओली सरकार को सत्ता से बाहर किया था. इस बार भी चुनावी बहस रोजगार, बेहतर जीवन, महिलाओं के अधिकार और पलायन जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रही है.
कान्तिपुर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र में रहने वाले मान बहादुर शाही कहते हैं कि उन्हें नेपाल से ज्यादा भारत की राजनीति की समझ है. 55 वर्षीय शाही सुदूरपश्चिम प्रांत के अछाम जिले से हैं. वे कहते हैं, "मैं 55 साल का हूं. मुझे भारत में काम करते हुए 40 साल हो गए हैं."
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वे आगे कहते हैं, "मुझे नहीं पता कि अछाम में कौन सी पार्टी या नेता है, मुझे तभी पता चलेगा जब भारत में चुनाव होंगे." उन्होंने बताया कि पहली बार घर जाने पर उन्होंने अपना नाम वोटर लिस्ट में दर्ज कराया था, लेकिन अब तक वोट नहीं दे पाए. उन्होंने बताया, "मैं अभी तक वोट नहीं दे पाया हूं."
बहादुर शाही कहना है कि अब सिर्फ पुरुष और महिलाएं ही नहीं, बल्कि बच्चे भी काम की तलाश में भारत आने लगे हैं. "घर के काम के बोझ की वजह से बच्चे पढ़ नहीं पा रहे हैं. वे बिना मां-बाप के बच्चों जैसे हो गए हैं. अगर उन्हें नेपाल में काम मिल जाता, तो इतनी परेशानी नहीं होती."
सिर्फ पुरुष ही नहीं, महिलाओं का वर्क डेस्टिनेशन भी भारत

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