
क्यों रशियन आर्मी की तरफ से जंग लड़ने को मजबूर हैं बांग्लादेशी? ये है वजह
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नौकरी की तलाश में रूस पहुंचे बांग्लादेशी यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में शामिल हो रहे हैं. बांग्लादेशी रूस की सेना में भरती हो रहे हैं. एक जांच में इसका खुलासा हुआ है.
बांग्लादेश के मकसूदुर रहमान को एक एजेंट ने अपने घर से हजारों किलोमीटर दूर दूर कड़ाके की ठंड वाले रूस में सफाईकर्मी की नौकरी के लिए राजी कर लिया. कुछ ही हफ्तों के भीतर वह रूस पहुंचा और उसने खुद को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस की तरफ से सेना में शामिल पाया.
अल जजीरा की रिपोर्ट के हवाले से एसोसिएटेड प्रेस समाचार एजेंसी की जांच में पता चला कि बांग्लादेशी लोगों को झूठे वादे करके रूस में फुसलाकर लाया जाता है. फिर उन्हें चार साल से चल रहे युद्ध में धकेल दिया जाता है. कई लोगों से हिंसा करवाई जाती है. उन्हें जेल भेजने या मौत की धमकी दी जाती है.
एपी ने रूसी सेना से भाग निकले तीन बांग्लादेशी पुरुषों से बात की. इनमें रहमान भी शामिल थे, जिन्होंने बताया कि मॉस्को पहुंचने के बाद, उन्हें और उनके साथ काम करने वाले बांग्लादेशी श्रमिकों के एक समूह को रूसी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, जो बाद में सैन्य अनुबंध निकले.
बुनियादी युद्ध कौशल की दी जाती है ट्रेनिंग उन्हें ड्रोन युद्ध तकनीकों, मेडिकल असिस्टेंट और भारी हथियारों का इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी गई. साथ ही बुनियादी वॉर स्कील की भी ट्रेनिंग दी गई थी. इसके लिए एक सेना शिविर में ले जाया गया था.
रहमान ने विरोध जताते हुए शिकायत की कि यह वह काम नहीं था जिसके लिए उसने सहमति दी थी. इस पर एक रूसी कमांडर ने ट्रांसलेशन ऐप के माध्यम से कड़ा जवाब दिया. उसने कहा कि आपके एजेंट ने आपको यहां भेजा है. हमने आपको खरीद लिया है.
जेल भेजने की दी जाती है धमकी रहमान ने बताया कि उनके ग्रुप के मजदूरों को 10 साल की जेल की धमकी दी गई और पीटा गया. रहमान ने कहा कि वे कहते थे - काम क्यों नहीं करते? रो क्यों रहे हो?' और हमें लात मारते थे. रहमान सात महीने बाद वहां से भागकर घर लौट आया.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












