
क्या है प्रशासनिक हिरासत, जिसके तहत गाजा पट्टी के अपराधियों को कैद में रखता आया इजरायल?
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हमास और इजरायल के बीच अस्थाई युद्ध विराम का पहला चरण शनिवार को खत्म होगा. इससे पहले हमास ने वो काम किया, जो इजरायल के गुस्से को दोबारा हवा दे सकता है. दरअसल 600 से कुछ ज्यादा फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई के बदले उसने तेल अवीव को चार बंधकों के शव सौंपे. अब इसपर अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी नाराजगी जताई है.
गाजा पट्टी के आतंकी गुट हमास ने हाल में चार इजरायली बंधकों के शव लौटाए, जिसके बदले इजरायल को 600 से ज्यादा कैदी उसे लौटाने पड़े, जो तेल अवीव की जेलों में कैद थे. सीजफायर का पहला चरण 1 मार्च को खत्म होगा, उससे पहले यह आखिरी होस्टेज एक्सचेंज हैं. इस बीच हमास की बर्बरता के अलावा ये बात भी हो रही है कि आखिर इतने सारे फिलिस्तीनी भी किस जुर्म में इजरायल की हिरासत में रहे.
डोनाल्ड ट्रंप के वाइट हाउस आने के लगभग साथ ही साथ इजरायल और हमास के बीच एक साल से ज्यादा वक्त से चली आ रही लड़ाई में छोटा पड़ाव आ गया. सीजफायर का ये पड़ाव अगले कुछ ही रोज में खत्म हो जाएगा. इससे पहले शर्तों के मुताबिक बंधकों और कैदियों का लेनदेन हुआ. लेकिन हमास ने सैकड़ों कैदियों के बदले बंधकों के शव लौटाए.
इसे लेकर ट्रंप अब हमास पर हमलावर हैं. वाइट हाउस में प्रेस से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि हमास ने चार युवा लोगों के शव भेजे. उनकी मौत यूं ही नहीं हुई होगी. ये सब बहुत परेशान करने वाला है. इससे पहले भी ट्रंप ने धमकाया था कि हमास ने जल्द ही और सकुशल सभी बंधकों को न लौटाया तो वे चुप नहीं रहेंगे.
ट्रंप के खौफ के बीच हमास तीन चरणों में इस सीजफायर के लिए राजी हुआ था - पहले स्टेप के तहत 19 जनवरी से 1 मार्च तक गाजा पट्टी में युद्धविराम रहेगा. यही चरण खत्म होने जा रहा है. - दूसरे फेज के लिए तय था कि फरवरी के पहले हफ्ते सब ठीक रहा तो इस चरण के लिए बात होगी, लेकिन ये बातचीत शुरू ही नहीं हुई. - तीसरे चरण में गाजा पट्टी को दोबारा बसाया जाएगा. ये लंबा चरण हो सकता है. इस दौरान इजरायल कुछ और कैदियों को हमास को सौंपता.
इजरायली जेलों में क्यों हैं फिलिस्तीन के लोग 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर बड़ा हमला किया, जिसमें हजार से ज्यादा नागरिक मारे गए. साथ ही आतंकी गुट ने करीब ढाई सौ लोगों को बंधक बना लिया. इन्हीं लोगों को छोड़ने के बदले वो इजरायली जेलों में बंद कैदियों को छु़ड़वा रहा है. दावा किया जा रहा है कि इजरायल प्रिजन सर्विस (आईपीएस) ने बड़ी संख्या में किशोरों को भी जेलों में डाल रखा है. यहां औसतन हर पांच में से एक शख्स जेल जाता है, जबकि पुरुषों के मामले में संख्या हर पांच में से दो हो जाती है.

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