
क्या शी जिनपिंग China के राष्ट्रपति नहीं हैं, अमेरिका क्यों जताता रहा जिनपिंग को प्रेसिडेंट कहने पर एतराज?
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शी जिनपिंग तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति बन गए हैं. नेशनल पीपल्स कांग्रेस की बैठक में इस पर मुहर लग गई. फिलहाल जिनपिंग चीन के सबसे ताकतवर शख्स तो हैं, लेकिन क्या वो वाकई राष्ट्रपति हैं! इसपर लंबे समय से बात हो रही है. असल में उनके पास कम्युनिस्ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी का तो टाइटल है, लेकिन राष्ट्रपति का नहीं.
मेंडेरियन भाषा में राष्ट्रपति के लिए एक शब्द है- 总统, जिसे जॉन्गटॉन्ग कहते हैं. चीन में कोई भी नेता दूसरे देशों के राष्ट्रपतियों की बात करता है तो यही टाइटल बोलता है. जैसे इमेनुएल मैक्रों फ्रांस के राष्ट्रपति हैं, या जो बाइडन अमेरिकी प्रेसिडेंट. हालांकि चीन अपने ही नेता शी जिनपिंग के लिए इस शब्द का इस्तेमाल नहीं करता है. वो सुप्रीम लीडर तो हैं लेकिन राष्ट्रपति नहीं.
कौन सी उपाधियां हैं जिनपिंग के पास शी जिनपिंग का आधिकारिक टाइटल पार्टी के जनरल सेक्रेटरी का है. इसके अलावा वे स्टेट-लीडर (नेशनल- लीडर) भी हैं. वे केंद्रीय सैन्य आयोग के भी अध्यक्ष हैं. लेकिन इनमें से कोई भी पद राष्ट्रपति का नहीं है. खुद चीन का मीडिया भी उन्हें पार्टी लीडर की तरह संबोधित करता आया. चीन के भीतर वेबसाइट्स पर सर्च किया जाए तो चेयरमैन शी जिनपिंग के नाम पर कई मिलियन वेब पेज दिखेंगे, जनरल सेक्रेटरी लिखा जाए तो भी यही रिजल्ट होगा, जबकि प्रेसिडेंट शी जिनपिंग लिखकर खोजा जाए तो इक्का-दुक्का पेज ही मिलते हैं.
तब जिनपिंग को राष्ट्रपति कहने का चलन कैसे आया? इसका श्रेय विदेशी नेताओं और मीडिया को जाता है. चूंकि ज्यादातर देशों में राजनैतिक तौर पर सबसे पावरफुल ओहदा राष्ट्रपति का होता है, तो चीन में भी सबसे ताकतवर पद पर बैठे लोगों को प्रेसिडेंट कहा जाने लगा. अमेरिका से इसका चलन शुरू हुआ तो अंग्रेजी-भाषी सारे देश इसे मानने लगे और देखादेखी एशियाई देशों में भी यही चलन आ गया. खुद चीन ने इसे बढ़ावा दिया ताकि ग्लोबल तौर पर घुलना-मिलना आसान हो जाए. ये अस्सी से नब्बे के बीच का दौर था, जब चीन का बाजार पूरी दुनिया में फैलने के शुरुआती चरण में था.
चीन के सरकारी न्यूजपेपर चाइना डेली में साल 2009 में कहा गया था कि राष्ट्रपति टाइटल इसलिए माना जा रहा है क्योंकि पूरी दुनिया में देश के मुखिया को राष्ट्रपति ही कहा जाता है. तो ये एक तरह से पश्चिम के बीच स्वीकार्यता का कदम था.
माओ भी नहीं थे राष्ट्रपति चीन में प्रेसिडेंट शब्द का इतिहास काफी उलझा हुआ रहा. साल 1954 में स्टेट हेड का पद बना, जिसपर माओ जेडॉन्ग थे. कुछ सालों बाद माओ ने अपने पसंदीदा नेता ल्यू शाओकी को इस पद पर बैठा दिया, हालांकि थोड़े ही समय बाद मतभेद के चलते माओ ने उसे पद से हटा भी दिया. माओ तब मॉर्डन चीन के सबसे लोकप्रिय और सबसे ताकतवर नेता थे. इसके बाद अस्सी के दशक में स्टेट हेड को बाहर की दुनिया में राष्ट्रपति कहने का चलन आ गया.
चीन अपने भीतरी सर्कल में जिनपिंग को स्टेट हेड ही कहता रहा. कई कम्युनिस्ट देश, जैसे क्यूबा, वियतनाम और लाओस में भी चीन के राष्ट्रपति की जगह स्टेट हेड ही कहा जाता है.

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