
क्या यूक्रेन के बाद अपने इस पड़ोसी पर हमला करने का इरादा बना चुका रूस? हालात हुए खतरनाक
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यूक्रेन पर हमले के बाद अब रूस दूसरे पड़ोसियों के साथ भी लड़ाई छेड़ सकता है. एस्टोनिया के साथ उसके रिश्ते लगातार खराब हो रहे हैं, यहां तक कि दोनों ने एक दूसरे के डिप्लोमेट्स को भी वापस भेज दिया. इन्हीं हालातों में एस्टोनियाई विदेश मंत्री मार्गस त्साहकना ने शंका जताई कि रूस उनपर हाइब्रिड हमला कर सकता है. यही डर महीनेभर पहले पोलैंड भी जता चुका.
अपने से कई गुना छोटे देश यूक्रेन के मोर्चे पर डटे रहने का गुस्सा रूस अब दूसरे पड़ोसियों पर भी उतार रहा है. खासकर एस्टोनिया से उसके रिश्ते काफी खराब हो चुके. वहां के विदेश मंत्री ने सीधे-सीधे शक जताया कि रूस उसपर हाइब्रिड अटैक कर सकता है. ये बात ऐसे समय में आई है, जब पूरी दुनिया ही रूस और चीन से किसी न किसी वजह से परेशानी की बात कह रही है.
लेकिन सवाल ये है कि एस्टोनिया भला ऐसा कौन सा देश है, जिसपर रूस नाराज है.
यूरोप के उत्तर-पूर्व में बाल्टिक सागर के पूर्वी तट पर बसा ये देश पहले सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था. नब्बे के शुरुआती दशक में जब सोवियत संघ में मिखाइल गोर्बाचेव लीडर थे. शीतयुद्ध की वजह से रूस दुनिया से कटा हुआ था. गरीबी और गुस्सा दोनों बढ़ चुके थे. तभी एक साथ कई अलगाववादी गुट पनपे और दुनिया की सबसे बड़ी ताकत 15 हिस्सों में टूट गई. इस्टोनिया इसी में से एक था.
ऐसे सुधारे आर्थिक हालात
जब ये देश रूस से अलग हुआ तो काफी बदहाल था. आम ढंग से समझें तो इसकी हालत जॉइंट फैमिली से रातोरात अलग हुए उस परिवार जैसी थी, जिसके पास मसाले रखने के लिए अलग डिब्बे तक नहीं होते. जल्द ही इसकी सरकार ने इकनॉमिक रिफॉर्म लाया. सोशलिस्ट देश की बजाए वे कैपिटलिस्ट बने. रूस या उत्तर कोरिया की तरह अलग-थलग जीने की बजाए एस्टोनिया सबके साथ व्यापार करने लगा.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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